अर्दला डेम के बेकवाटर में पाडल फाटा ग्राम के 11 बच्चों की मौत ने उनके परिवारों और पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। बच्चे माता प्रतिमा विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार थे। ट्रैक्टर चालक दीपक पिता सखाराम जामली पुलिया से मोड़ नहीं देख ट्रॉली को बेकवाटर में दौड़ाने लगा, जिससे वह गहरे पानी में समा गई। ट्रॉली में बैठे 24 महिला-पुरुष और बच्चे तैरकर बच गए, लेकिन 11 बालक-बालिकाओं की डूबने से मौत हो गई। अंतिम संस्कार के समय श्मशान घाट तक का रास्ता घुटनों तक कीचड़ से भरा था। परिजन बच्चों की अर्थियां कंधों पर लेकर मुश्किल से श्मशान पहुंचे। माता-पिता का कलेजा फटा हुआ था, आंखों में आंसू और घरों में रुदन लगातार जारी था। प्रशासन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगमन के लिए दो घंटे में सड़क बनाई, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने रोड बनाने का विरोध किया और पुलिस से हल्की-फुल्की झड़प भी हुई। एसपी मनोज कुमार राय, डीएसपी और अन्य अधिकारियों ने मौके पर आकर स्थिति को नियंत्रण में लाया। घटना ने गांव में गहरी शोक लहर दौड़ा दी है। माता-पिता और परिजन बच्चों की याद में रातभर रोते रहे। प्रशासन और पुलिस के प्रयासों के बावजूद सड़क और हेलीपेड के लिए की गई जल्दबाजी पर ग्रामीण नाराज रहे। पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है। मां की ख्वाहिश थी बेटी अफसर बनें… संगीता 10वीं की छात्रा थी। उसके पिता ज्ञान सिंग का पूर्व मंे ही निधन हो चुका है। परिवार में मां प्रमिला व एक छोटा भाई कालू है। संगीता रजूर में होस्टल मंे रहकर पढ़ाई कर रही थी। परिजन ने बताया कि संगीता पढ़ने में अच्छी थी। मां की ख्वाहिश थी कि बेटी संगीता पढ़कर अफसर बनें। इसी तरह, किरण भी दसवीं की छात्रा थी। आरती व शर्मिला होनहार बालिकाएं थी। घर में उनके बनाए आर्ट क्राफ्ट के सामान से घर सजा हुआ था। लेकिन दोनों की मौत के बाद इस सजे घर की रौनक चली गई। आरती के परिवार से पिता प्यार सिंग व भाई और दोनों बेटियां भी पानी में डूब गए थे। जिनमें से तीन बाहर आ गए लेकिन दोनों बहनें डूब गई।


