बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार पर खुद को मोटा समझना और फिर पतले होने की होड़ में दवाओं व सप्लीमेंट का सेवन करना आपको परेशानी में डाल सकता है। बीते पांच सालों में दवाओं के उपयोग से वजन कम करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो नए प्रकार के रोग को जन्म दे रही है। 8% दर से बढ़ रही दवाओं की मांग फार्मास्युटिकल मार्केट का एनालिसिस करने वाली कंपनी एक्युएंट की रिपोर्ट बताती है कि फिटनेस का क्रेज बढ़ रहा है। यही कारण है कि सालाना 8% की दर से मिनरल, विटामिन और न्यूट्रीशन से जुड़ी दवाओं की मांग बढ़ रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए कई ऐसी दवाएं मार्केट में आ रही हैं, जो साइड इफेक्ट का कारण बन रही हैं। ऐसी समस्याओं के साथ व्यक्ति पहुंच रहे अस्पताल अकेले जनवरी में ही जेपी अस्पताल, एम्स और शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय में ऐसे ही दुष्प्रभाव के चलते 16 केस सामने आए। इनमें पाचन समस्याएं, एलर्जी, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मांसपेशियों और सिरदर्द जैसे लक्षण देखे गए। सिर्फ बीएमआई मोटापे का मापदंड नहीं शासकीय होम्योपैथी वेलनेस सेंटर की इंचार्ज डॉ. जूही गुप्ता के अनुसार यदि बीएमआई 25 से अधिक यानी प्री-क्लीनिकल मोटापा हो, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या न हो, तो दवाओं व सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि सिर्फ बीएमआई को अकेले मापदंड के रूप में देखना गलत है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता के अनुसार बीएमआई एक सरल और आसानी से उपलब्ध मापदंड है, लेकिन यह शरीर में चर्बी की मात्रा को पूरी तरह से नहीं दर्शाता। जिन व्यक्तियों में मांसपेशियों की मात्रा ज्यादा होती है और हड्डियों की घनत्व अधिक होती है, उनका बीएमआई बढ़ा हुआ आता है, लेकिन उनमें चर्बी की मात्रा कम हो सकती है। ऐसे व्यक्ति वजन कम करने के लिए जाएंगे तो यह नुकसानदायक हो सकता है। हर व्यक्ति की शरीर संरचना भी अलग होती है। किस हिस्से में चर्बी ज्यादा, बता रही मशीन शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय के वेलनेस सेंटर में करीब 25 लाख की बॉडी कंपोजिशन एनालाइजर मशीन मौजूद है, जहां रोजाना 15 से 20 लोग जांच के लिए पहुंचते हैं। यह मशीन शरीर के 70 पैरामीटर पर जांच करती है, जिसमें बीएमआई एक है। इसके अलावा बोन हेल्थ, टिश्यू हेल्थ, वास्तविक एज और शरीर का हाल किस एज ग्रुप जैसा है, समेत अन्य शामिल हैं। इसके लिए व्यक्ति को मात्र 50 रुपए का भुगतान करना होता है। 28.36 फीसदी आबादी मोटापे से ग्रसित पं. खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज के रिसर्च के अनुसार राजधानी की 28.36 फीसदी आबादी मोटापे से ग्रसित है। संस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला ने बताया कि मोटापे के साथ सांस फूलना, हृदय रोग, लिवर से जुड़ी समस्या, डायबिटीज, बीपी, जोड़ों का दर्द आदि लक्षण होना चिंता की बात है। बेवजह दवा न खाएं वेलनेस सेंटर की बॉडी कंपोजिशन एनालाइजर मोटापे को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है। हर व्यक्ति की बनावट अलग होती है, इसलिए सिर्फ बीएमआई के आधार पर दवाओं का सेवन गलत है। हमें वेलनेस कॉन्सेप्ट को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे बिना दवा के हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बेहतर शेप में आ जाएं। लेकिन युवा कॉस्मेटिक कॉन्सेप्ट में कई बार खुद के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर लेते हैं। अकेले बीएमआई सही पैमाना क्यों नहीं वजन घटाने का हेल्दी तरीका


