“अगर दवा की दुकान पर बैठा व्यक्ति इलाज कर सकता है, तो मैं एम्स में बैठकर इलाज क्यों करता?” यह कहना है एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. मनीष खंडारे का। शरीर पर हल्की-सी खुजली या लाल चकत्ते दिखाकर सीधे मेडिकल स्टोर से एक ट्यूब खरीद ली। यही आदत लोगों को लंबे समय तक चलने वाली गंभीर बीमारी की तरफ धकेल रही है। रिंग वर्म यानी दाद, जो पहले 15 से 30 दिन में ठीक हो जाया करता था, अब कई मामलों में एक साल या उससे ज्यादा समय तक पीछा नहीं छोड़ रहा। इसकी वजह एक नया और ज्यादा ताकतवर फंगस है। इसके साथ ही ज्यादा खतरनाक कारण है, बिना डॉक्टर की सलाह स्टेरॉइड और कॉम्बिनेशन क्रीम का इस्तेमाल करना। इससे ना केवल चेहरों पर बाल उगते हैं और त्वचा जल जाती है बल्कि लिवर तक को नुकसान पहुंचता है। IADVL ने 18 क्रीम को लेकर किया अलर्ट
भारतीय त्वचा रोग विशेषज्ञ संघ (IADVL) ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए 18 ऐसी क्रीम के लेकर अलर्ट किया है। एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग ने इस अलर्ट को ओपीडी में सर्कुलेट भी किया है। जिससे लोगों को अवेयर किया जा सके। एम्स के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष खंडारे ने बताया कि कई क्रीम इलाज करने की बजाय संक्रमण को दबाती हैं और अंदर ही अंदर बीमारी को और मजबूत बना देती हैं। यही हाल रहा तो आने वाले समय में फंगल इंफेक्शन का इलाज डॉक्टरों के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाएगा। नया फंगस काफी आक्रामक, पुरानी दवाएं बेअसर
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में फंगल इंफेक्शन का पैटर्न पूरी तरह बदल गया है। अब जो फंगस सामने आ रहा है, वह पहले से ज्यादा आक्रामक है। इस पर आम एंटी-फंगल दवाएं असर नहीं कर पा रहीं। इसकी सबसे बड़ी वजह स्टेरॉइड बेस्ड क्रीम का धड़ल्ले से इस्तेमाल है। स्टेरॉइड बीमारी को खत्म नहीं करते, बल्कि लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देते हैं। इससे मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया, लेकिन कुछ ही दिनों में संक्रमण और ज्यादा फैलकर लौट आता है। रेपिड सॉल्यूशन चाहत बिगाड़ रही सेहत
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. मनीष खंडारे बताते हैं कि आज की व्यस्त जिंदगी में लोग रेपिड सॉल्यूशन चाहते हैं। शरीर के किसी हिस्से में रैश या खुजली हुई नहीं कि सीधे मेडिकल स्टोर पहुंच जाते हैं। वहां बिना जांच के एक क्रीम खरीद ली जाती है। डॉ. खंडारे कहते हैं- दवा दुकानदारों की सोच यह रहती है कि “कुछ न कुछ तो काम कर ही जाएगा।” अधिकतर क्रीम में स्टेरॉइड, एंटीफंगल और एंटीबायोटिक तीनों का मिक्सचर होता है। इससे शुरुआत में खुजली और लालिमा कम हो जाती है, लेकिन असल बीमारी अंदर ही अंदर फैलती रहती है। गलत दवाओं का इस्तेमाल बढ़ा
स्टेरॉइड बेस्ड क्रीम लगाने पर मरीज को 2–3 दिन में राहत मिल जाती है। यही सबसे बड़ा धोखा है। असल में रैशेस के पीछे कई कारण हो सकते हैं। फंगल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन और एलर्जी अलग अलग बीमारी हैं। इनके लिए अलग दवा होती है। गलत दवा लगाने से बीमारी दबती नहीं, बल्कि मजबूत हो जाती है। होम्योपैथी वेलनेस सेंटर की प्रभारी डॉ. जूही गुप्ता बताती हैं कि गलत इलाज के कारण जो रोग पहले 15 से 30 दिन में ठीक हो जाते थे, अब महीनों तक चल रहे हैं। कई मरीज एक साल से ज्यादा समय तक दाद से परेशान हैं। स्टेरॉइड दवाएं शरीर की इम्यूनिटी को भी प्रभावित करती हैं। इससे सही दवा का असर भी कमजोर हो जाता है। जब मरीज बाद में डॉक्टर के पास पहुंचता है, तब भी इलाज में बहुत समय लगता है। एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल दवाएं भी बेअसर
स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई मामलों में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल दवाएं असर करना बंद कर चुकी हैं। डॉ. खंडारे के अनुसार, स्टेरॉइड से शरीर की इम्यूनोलॉजी बदल जाती है। जो दवा पहले एक हफ्ते में असर दिखा देती थी, अब वही दवा 6 महीने या एक साल में भी पूरा असर नहीं कर पा रही। पहले एक दवा काफी होती थी, अब 2–3 तरह की दवाएं देनी पड़ रही हैं। कई कॉम्बिनेशन क्रीम पर बैन, फिर भी बिक रहीं
एम्स के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष खंडारे के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि कई कॉम्बिनेशन क्रीम पर बैन लगा हुआ है। इसके बावजूद कंपनियां इन्हें बना भी रही हैं और बाजार में खुलेआम बिक भी रही हैं। इससे त्वचा रोग धीरे-धीरे रजिस्टेंट होते जा रहे हैं। अगर यही हाल रहा, तो भविष्य में इन बीमारियों का इलाज बेहद मुश्किल हो जाएगा। लगातार हेवी स्टेरॉइड क्रीम से लड़ते-लड़ते फंगस खुद को बदल रहा है। यह अब ज्यादा तेजी से फैल रहा है और ज्यादा गंभीर इंफेक्शन पैदा कर रहा है। अब यह समस्या केवल निजी नहीं, बल्कि पब्लिक हेल्थ इश्यू बनती जा रही है। रिंग वर्म मामलों में तेजी, लिवर तक पहुंच रहा असर
गांधी मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. कुलदीप गुप्ता बताते हैं कि रिंग वर्म के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। तुरंत आराम के लिए लोग स्टेरॉइड दवाएं ले रहे हैं। इससे बीमारी दब जाती है, लेकिन दवा बंद करते ही वापस लौट आती है। लंबे समय तक स्टेरॉइड लेने से लिवर में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ रही हैं। सही इलाज में 30 से 45 दिन लगते हैं, लेकिन लोग बीच में कोर्स छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी फिर उभर आती है। ये खबरें भी पढ़ें… इम्युनिटी कमजोर तो सबसे आम वायरस भी जानलेवा ज्यादातर लोग जीवन में कम से कम एक बार पार्वो वायरस B19 नाम के वायरस के संपर्क में आते हैं। आम हालात में यह गंभीर नहीं होता, लेकिन एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने पाया कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यही वायरस दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे इन्सेफलाइटिस कहते हैं। पढ़ें पूरी खबर…


