शाम के 7 बजे हैं। हम अलवर के मेवात इलाके में हैं, जहां दुष्कर्म के केस काफी ज्यादा हैं। हम रामगढ़ थाने के मिलकपुर व मानकी सहित दर्जनभर गांवों में गए। माहौल में अजीब-सा डर और बेचैनी है। यहां उजाले भी उतने ही डरावने हैं, जितने रात के अंधेरे। पत्रकार होने के बावजूद हम चाहते थे कि यह रास्ता जल्द खत्म हो जाए। हालांकि यह डर हम दिन की रोशनी में विराटनगर में भी महसूस कर चुके हैं। विराटनगर से सरिस्का के रास्ते में बने एक घर के बाहर छोटे बच्चों के कपड़े सूख रहे थे। बच्चों की दादी ने बताया कि उनके घर में एक से सात साल तक की 4 पोतियां हैं, लेकिन चारों को वे लड़कों के कपड़े पहनाती हैं ताकि उन्हें कोई भी देखे तो लड़का ही समझे। ऐसी ही स्थिति तिजारा क्षेत्र में दिखी।
यही चिंता हमें मेवात के ज्यादातर परिवारों में नजर आई। थानागाजी की ओर बढ़ते हुए बाजार में पुरुषों के कपड़ों, जूतों और सैलून के बीच साड़ी की एक दुकान दिखी, लेकिन यहां भी खरीदार पुरुष ही थे। सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की अनुपस्थिति हमें चौंका रही थी। आगे हमें लड़कियां और महिलाएं दिखीं तो सही लेकिन झुंड में। सभी ने स्कार्फ बांधा था, सिर्फ आंखें दिख रही थीं। वहां खड़े खाली टैम्पो की जगह वे भरे हुए टैम्पो के इंतजार में थी। पणदो से आई छात्रा सुनीता सैनी ने बताया- खाली टैम्पो में हमें डर लगता है। हम मांदरी गांव पहुंचे, जहां पॉक्सो के कुछ मामले थे। वहां लड़कियां घर की दहलीज पर भी मुंह पर कपड़ा बांधे बैठी थीं। हमने सोचा घर में कौन ऐसे रहता है? आसपास नजर घुमाई तो कुछ घरों की खिड़कियां इस तरह ढकी थीं, जिनमें नजरें तो क्या रोशनी और हवा भी नहीं पहुंच पाती। फ्रॉक-सलवार और घाघरा-चोली घर के अंदर सुखाए हुए थे, ताकि किसी की नजर ना पड़े। पुरुषों के कपड़े बाहर ही सूख रहे थे। ये महिलाओं की अपनी सुरक्षा व्यवस्था है। यहां के हालातों की गंभीरता बताते हुए एडवोकेट अशोक शर्मा ने कहा- यहां 5 से 7 साल की बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें शिकार बनाना आसान होता है। रिटायर्ड सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रवि माथुर ने बताया- उनके पास साल में रेप के ढाई सौ मामले आते थे। जानवरों तक से ज्यादती के मामले उन्होंने सुने थे। डिप्टी एसपी (स्पेशल इंवेस्टीगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन इंचार्ज) डॉ. पूनम चौहान बताती हैं- कुछ महीनों में मैंने 70 से ज्यादा पॉक्सो केस देखे हैं। हालात तभी बदलेंगे जब हम लड़कों को समझा, सिखाकर संवेदनशील बनाएंगे। घर के दरवाजे पर सोते हैं पिता और भाई 14 की उम्र में कर देते हैं बेटियों की शादी तुलेड़ा के मालीवास में स्थानीय लोगों ने बताया- दुष्कर्म के डर से गांव में कई बच्चियों की शादी 14 साल की उम्र में कर दी गई। पिता और भाई घर के दरवाजे पर सोते हैं। मां हमेशा बच्चियों के पास रहती है। सरपंच बब्बल यादव और बामोली के पूर्व सरपंच वीर सिंह ने बताया- हमने स्कूलों में शिक्षकों को बोला है कि कोई बच्चा स्कूल नहीं आए तो घर पर सूचना दें। हमें भी मिली सलाह- उधर मत जाओ, खतरा है
एसएचओ सवाई सिंह ने बताया- रामगढ़, नौगावां, बगड़ तिराहा, एमआईए में दुष्कर्म केस ज्यादा हैं। हम उन इलाकों के लिए निकले। अंधेरा होने पर स्थानीय लोगों ने हमसे कहा- उधर मत जाओ, बहुत खतरा है। हम देहात की सड़क पर आगे बढ़े, सड़क के दोनों ओर खेत हैं, सुनसान इलाका है, लाइट भी नहीं। तड़के पानी के लिए महिलाओं को 2 किमी तक चलना पड़ता है, यह सुरक्षित नहीं।


