अलवर में सीवरेज में उतरे दादा-पोते की मौत:बाहर नहीं आए तो देखने उतरा था नाबालिग, दम घुटने से जान गई; 10-10 लाख की सहायता

सीवरेज लाइन में दम घुटने से दादा और नाबालिग पोते की मौत हो गई। दोनों सीवरेज की सफाई के लिए आए थे। दादा काफी देर तक बाहर नहीं आए तो पोता उसे देखने नीचे उतरा। इसके बाद दम घुटने से दोनों की मौत हो गई। परिजनों ने मॉर्च्युरी के बाहर आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग की है। मामला शनिवार का अलवर के खेड़ली का नवकार वाटिका स्थित पेपर मिल का 11 बजे का है। इस मामले में रात करीब 10 बजे पोस्टमार्टम कराया गया। मृतकों के परिजनों को वाटिका संचालक की ओर से 10-10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग मानी गई। परिजनों ने दर्ज करवाया मामला खेड़ली थाना SHO धीरेन्द्र गुर्जर ने बताया कि सीवरेज लाइन में उतरने से लच्छी (50) और आकाश (17) की दम घुटने से मौत हो गई। देर शाम दोनों का पोस्टमॉर्टम करवाया गया। परिजनों ने नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग है। साथ ही नवकार वाटिका सोसाइटी के खिलाफ रिपोर्ट दी है। परिजनों की जांच के आधार पर जांच की जा रही है। दादा को देखने पोता उतरा, लौटा ही नहीं जानकारी के अनुसार, नवकार वाटिका स्थित पेपर मिल में सीवरेज का काम चल रहा था। इस दौरान दादा लच्छी और पोते आकाश को सफाई के लिए बुलाया गया था। इस दौरान लच्छी सीवरेज में उतरा था और सफाई कर रहा था। वह काफी देर तक बाहर नहीं आया तो पोता आकाश भी देखने उतरा। इसके बाद दोनों ही बाहर नहीं आए। आसपास मौजूद लोगों ने हल्ला मचा दिया और पुलिस को सूचना दी। दोनों को बाहर निकालकर अलवर के जिला अस्पताल लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन और वाल्मीकि समाज के लोग भी अस्पताल पहुंच गए। नगर पालिका के वाइस चेयरमैन संदेश खंडेलवाल, पार्षद मुरारीलाल शर्मा और व्यापार समिति अध्यक्ष प्रमोद बंसल ने भी अस्पताल पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। मृतक परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए परिवार में किसी को सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता की मांग की। 2013 से ही अपराध है मैनुअल स्कैवेंजिंग मैनुअल स्कैवेंजिंग यानि मानव मल को हाथ से ढोने का काम, प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऑफ मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन बिल 2012 में लोकसभा में लाया गया था। इसके बाद सितंबर 2013 में ये लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पास हुआ। इसके अनुसार किसी से मैनुअल स्‍कैवेंजिंग कराने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। ​​​​ एक्ट के अनुसार इनसैनिटरी टॉयलेट्स बनवाना अब गैर-कानूनी है। इनसैनिटरी टॉयलेट्स वो टॉयलेट्स होते हैं, जिसमें मानव मल को हाथ से साफ करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे टॉयलेट्स में मानव मल या तो एक खुले गड्ढे या एक टैंक में इकट्ठा होता है जिसे बाद में मैनुअली साफ किया जाता है। मानव मल ढोना इंसान नहीं, मशीनों का काम है मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के सेक्शन 33 के अनुसार, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए टेक्नोलॉजिकल एप्लायंस इस्तेमाल किए जाने चाहिए। सरकार इसके लिए आर्थिक मदद भी करती है। भारत में सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के लिए दो तरह की मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है… इसके अलावा टॉयलेट्स जिनमें पहले मानव मल को ट्रीट करने के बाद सीवेज सिस्टम में रिलीज किया जाए, तो मैनुअल क्लीनिंग की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तरह के टॉयलेट्स को सैनिटरी टॉयलेट कहा जाता है।

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