अलास्का से उड़कर झारखंड आई चिड़ियां

शीतकाल में विदेशों से प्रवास पर आने वाले जलीय पक्षियों के साथ घास के मैदान और झाड़ियों को अपना बसेरा बनाने वाले छोटा पक्षी भी आते हैं। आने वाले प्रवासी पक्षियों में से एक छोटी चिड़िया नीलकंठी कीटमार (ब्लूथ्रोट) भी है। इस पक्षी को माघ और श्यामकंठी भी कहा जाता है। इसके नर पक्षी के कण्ठ के नीचे एक नीली आभा वाली पट्टी होती है। इसी के कारण इसका नाम नीलकंठी रखा गया है। इसका मुख्य भोजन उड़ते हुए कीट पतंगा है। इसीलिए इसे कीटमार (फ्लाईकैचर) चिड़िया की श्रेणी में रखा गया। 13-14 सेंटीमीटर लंबी चिड़िया यूरेशिया और अलास्का के क्षेत्र से लंबी उड़ान भरकर झारखंड पहुंची है। एक जनवरी को बर्ड वाचर अमित जैन पाटनी ने छड़वा डैम परिसर में ब्लूथ्रोट की फोटो लिया। सर्दियों की शुरुआत में आया यह पक्षी अप्रैल में वापस लौट जाता है। अमित जैन बताते हैं कि छोटी सी चिड़िया सर्दियों में भारत आ जाती है लेकिन यह प्रजनन करने के लिए यूरोप जाता है। देशभर के बर्ड वाचर जाड़े में इस छोटी चिड़िया की तस्वीर लेने के लिए घंटों मेहनत करते हैं। बर्ड वाचर को नजदीक देखकर चिड़िया भाग जाती है। सबसे अच्छी बात है कि जाड़े में यह चिड़िया पूरे भारत में दिखेगी।

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