अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण दें:वरना आप नकली हिंदू, पाखंडी-ढोंगी; सिर्फ दिखावे के लिए गेरुआ धारण किया

प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया। मैंने वह दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया। अब मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने कहा- हम आपको 40 दिन का समय दे रहे। इन दिनों में आप अपने गो-भक्त होने का प्रमाण दीजिए। अगर आप यह प्रमाण नहीं दे पाते, तो समझा जाएगा कि आप नकली हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए आपने गेरुआ वस्त्र धारण किया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री और जगद्गुरु रामभद्राचार्य इस समय घेरा बनाकर गोहत्या बंदी की मांग करने वालों पर तरह-तरह के हमले कर रहे हैं। भारत से होने वाले कुल गोमांस निर्यात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सिर्फ उत्तर प्रदेश से होता है। लगभग आधा निर्यात यूपी से हो रहा है। इसलिए तत्काल उत्तर प्रदेश से गोमांस का निर्यात रोका जाना चाहिए। या तो अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए, नहीं तो यह भगवा चोला उतार दीजिए। शंकराचार्य की बड़ी बातें पढ़िए 1- लखनऊ में जुटेंगे संत, तय करेंगे कौन असली हिंदू शंकराचार्य ने कहा- हम लोग दिल्ली जाने वाले थे। कम्प्यूटर बाबा ने इसके लिए आमंत्रित भी किया था। लेकिन अब हमारा विचार है कि दिल्ली न जाकर 10–11 मार्च को लखनऊ में सभी संत-महंत और आचार्य एकत्र हों। वहां यह तय किया जाएगा कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट है और किसे छद्म हिंदू या नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए। 2- अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- अब जब माघ आएगा, हम लोग फिर वहां जाएंगे। अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश किया जाना है। जितने भी हिंदू हैं, उनके साथ बहुत बड़ा छल हो रहा है। यह छल खुद को साधु, योगी, संत और भगवाधारी कहने वाले व्यक्ति और उसकी पार्टी द्वारा किया जा रहा है। 3- मेला छोड़ने पर कहा- प्रशासन लालच दे रहा था, हमने नकारा माघ मेला छोड़ने पर शंकराचार्य ने कहा- जब हमने प्रयागराज छोड़ा, उसी समय हमने सब बता दिया था। हम चाहते हैं कि यह मामला अब अगले माघ मेले में ही उठाया जाए। माफी मांगने का भी एक तरीका होता है, क्षमा याचना करनी पड़ती है। प्रशासन की ओर से हमें लालच दिया जा रहा था कि आप ऐसे नहा लीजिए, आपके ऊपर फूल बरसा देंगे। अगले वर्षों के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बना देंगे, लेकिन हमने उसे नकार दिया। हमने कहा कि जिन संन्यासियों, बटुकों, ब्रह्मचारियों और माताओं पर आपने लाठी बरसाई है, उनसे माफी मांगिए, क्षमा याचना कीजिए। अगर वे क्षमा कर दें, तो ठीक। लेकिन इस सब के लिए प्रशासन आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि हमें लोभ-लालच देना चाहते थे, जिसे हमने स्वीकार नहीं किया। अब तक क्या हुआ, जानिए- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

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