भास्कर न्यूज | बालोद सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के दायरे में सीएमएचओ, बीएमओ कार्यालय की 100 मीटर बाउंड्रीवाल भी आ रही है। जिसे तोड़कर हटाने के लिए गुरुवार को पीडब्ल्यूडी की टीम पहुंची थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके पहुंचे फिर सब इंजीनियर से चर्चा कर मंगलवार तक के लिए काम रुकवा दिया। सीएमएचओ का कहना है कि कार्यभार संभाले मुझे दो दिन ही हुए हैं। पीडल्ब्यूडी की नोटिस मिलने की जानकारी है लेकिन बाउंड्रीवॉल को तोड़ेंगे तो नया भी बनाना पड़ेगा। जिसके लिए अभी फंड नहीं है। ऐसे में मंगलवार तक कलेक्टर से चर्चा करने के बाद ही पीडब्ल्यूडी वालों को बताएंगे कि कब से बाउंड्रीवाल तोड़ सकते हैंं। सीएमएचओ से चर्चा करने के बाद पीडब्ल्यूडी की टीम को बैरंग लौटना पड़ा। इंजीनियर के अनुसार बाउंड्रीवाल हटाने सभी तैयारी हो गई थी लेकिन सीएमएचओ ने कुछ दिन का समय मांग लिया। इस वजह से अतिरिक्त समय दिया गया है। शहर के दल्ली चौक से पाररास तक सड़क चौड़ीकरण व डिवाइडर निर्माण कार्य प्रस्तावित है। पीडब्ल्यूडी व राजस्व िवभाग का दावा अधिकतर लोग खुद ही कब्जा हटा चुके पीडब्ल्यूडी व राजस्व विभाग के अफसरों का दावा है कि नोटिस मिलने के बाद अधिकांश लोग स्वेच्छा से कब्जा हटा चुके हैं। तहसीलदार आशुतोष शर्मा ने बताया कि स्वेच्छा से कब्जा हटाने के कारण अब बड़े अभियान की आवश्यकता नहीं है। सीएमएचओ अॉफिस की बाउंड्रीवाल को हटाने पीडब्ल्यूडी ने चिह्नांकित किया है। उन्होंने अनापत्ति दे दी है। पीडब्ल्यूडी अपने संसाधन से तोड़ेगा। पीडब्ल्यूडी के अनुसार कब्जा हटाने के दौरान विवाद की स्थिति नहीं बनेगा, ऐसा उम्मीद है क्योंकि नोटिस मिलने के बाद लोग स्वेच्छा से कब्जा हटा चुके है। जहां जरूरत पड़ेगी, नियमानुसार कार्रवाई होगी। घर व दुकान के शेड, चबूतरा को हटाने की नौबत, कार्रवाई की चेतावनी दी गई पीडब्ल्यूडी ने अवैध कब्जा हटाने दल्ली चौक से मधु चौक, पाररास तक सड़क के दोनों किनारे कुल 137 लोगों के अलावा सीएमएचओ को भी नोटिस थमाया है। प्रोजेक्ट के चलते अधिकांश गुमटी, ठेले वाले प्रभावित हो रहे हैं। कई व्यापारियों के घर व दुकान के शेड प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं। जिसे स्वेच्छा से हटाने कहा गया है। स्वेच्छा से न हटाने की स्थिति में पीडल्ब्यूडी, राजस्व विभाग, नपा, जिला प्रशासन की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि प्रशासन चाह रही है कि लोग स्वयं से होकर कब्जा ले ताकि विवाद की स्थिति न बने। इस वजह से ही नोटिस देने के बावजूद अब तक तीन सप्ताह बीत चुके हैं।


