अवैध निर्माण और जिम्मेदारों पर एक्शन की रिपोर्ट निगम ने 38 लेटर के बाद भी नहीं दी

शहर में अवैध निर्माण रोकने में नगर निगम नाकाम रहा है। इसे रोकने और जिम्मेदार कर्मचारियों और अफसरों पर एक्शन लेने को लेकर रिपोर्ट लोकपाल और लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट को भेजनी थी लेकिन 38 लेटरों के बाद भी निगम ने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट बनाकर नहीं भेजी। यही नहीं अवैध निर्माण की शिकायत पर एक्शन लेने के बाद ये जानकारी रजिस्टर में दर्ज करनी थी। नतीजा ये रहा कि बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन होने से रिहायशी इलाकों में कमर्शियल बिल्डिंग बनने से शहर में कंक्रीट का जंगल बनकर तैयार हो चुका है। निगम क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टर और अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। पिछले 10 साल में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल इमारतें अस्तित्व में आईं। इसमें शोरूम, अस्पताल, मॉल, पीजी, होटल बनकर तैयार हो गए। अवैध निर्माण पर एक्शन वाले रजिस्टर तक नहीं बनाए नगर निगम अफसर अवैध निर्माण करने वालों पर इतने मेहरबान दिखे कि उनहोंने अवैध निर्माण पर एक्शन वाले रजिस्टर तक नहीं बनाए। जबकि लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट की ओर से इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए गए थे। बाकायदा आदेश जारी किए गए थे कि बिल्डिंग ब्रांच की टीम एक रजिस्टर तैयार करेगी। इसमें अवैध निर्माण की शिकायत दर्ज होगी और इसके बाद टीम की ओर से की गई कार्रवाई का उल्लेख रजिस्टर में किया जाएगा। ताकि अवैध निर्माण का रिकार्ड तैयार हो सके। लेकिन निगम अफसरों की लापरवाही के कारण अवैध निर्माण का रिकार्ड भी निगम के पास नहीं है। इस बार भी वसूली करने में पिछड़ी बिल्डिंग ब्रांच नगर निगम कमिश्नर की ओर से 2024-2025 में बिल्डिंग ब्रांच की टीम को 48 करोड़ का राजस्व हासिल करने के लिए टारगेट दिया गया था। इसमें अवैध निर्माण करने वालों पर कार्रवाई कर रेवेन्यू वसूल करना था लेकिन निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने खानापूर्ति के तौर पर कार्रवाई कर काफी कम मामलों में रेवेन्यू वसूला। अतिक्रमण करने वालों पर अफसर मेहरबान रहे और नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच राजस्व हासिल करने में भी पिछड़ी है। 48 करोड़ में से मात्र 15 करोड़ ही राजस्व वसूल किया जा सका है। 2024 में भी नगर निगम शत प्रतिशत रेवेन्यू हासिल नहीं कर पाया था। इन इलाकों में हैं अवैध निर्माण मॉडल टाउन रोड में अवैध निर्माण। लोकपाल और लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट ने नगर निगम को लेटर भेजे {मॉडल टाउन {बाड़ेवाल रोड {बाबा दीप सिंह गुरुद्वारा रोड {हैबोवाल {जमालपुर {चंडीगढ़ रोड निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने कई इमारतों को कंपाउंडेबल श्रेणी में लाकर इन्हें राहत दे दी लेकिन शहर कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है। इसे लेकर लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट, हाईकोर्ट और लोकपाल तक शिकायत की गई। हाईकोर्ट ने सुनवाई कर निगम को सर्वे के आदेश दिए, वहीं लोकपाल और लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट की ओर से 2020 से 2024 तक 23 लेटर निगम कमिश्नर कार्यालय को भेजे गए। इसमें अवैध निर्माण पर एक्शन और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर की कार्रवाई आदि के बारे में रिपोर्ट बनाकर लोकपाल को भेजनी थी लेकिन निगम प्रबंधन ने ऐसा नहीं किया। इसी तरह, नॉन कंपाउंडेबल बिल्डिंग पर एक्शन लेने के लिए 15 लेटर विजिलेंस और लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट ने नगर निगम को भेजे, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति रही। अवैध निर्माण करने वालों पर सख्त एक्शन लेने में निगम विफल रहा है। निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल ने बताया कि अवैध निर्माण की शिकायत पर बिल्डिंग ब्रांच को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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