राजधानी के आउटर इलाकों में अवैध प्लॉटिंग बंद ही नहीं हो रही है। निगम की लगातार कार्रवाई के बाद भी दलाल बेखौफ हैं। क्योंकि न निगम सख्त कार्रवाई कर रहा है और न ही पुलिस अपराधिक मामला दर्ज कर रही है।
अवैध प्लॉटिंग की शिकायत मिलने पर निगम का अमला वहां की कच्ची सड़क तोड़कर पुलिस में केस दर्ज करने का प्रस्ताव बनाकर भेज देता है। पांच साल में निगम ने 329 प्रकरण की जांच कर पुलिस में केस दर्ज करने भेजे हैं। चौंकाने वाली बात है कि पुलिस ने अब तक केवल 20 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की। बाकी सारे प्रस्ताव जांच का हवाला देकर थाने में ही डंप कर दिए गए हैं। शहर में अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने की जिम्मेदारी तहसीलदार, आरआई, पटवारी, निगम के जोन अफसर, टाउन प्लॉनिंग के अधिकारी और पुलिस वालों की होती है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि अवैध प्लॉटिंग वाली जमीन के एग्रीमेंट से लेकर बिक्री होने तक सभी का कमीशन तय है। इस वजह से न तो दोषियों की पहचान की जा रही है और न ही उन पर कोई कार्रवाई। कार्रवाई के लिए टीम ही नहीं जो हैं वो आंख मूंदे बैठे कहीं भी प्लाटिंग के लिए ले-आउट एप्रूवल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग करता है। बिल्डर, कॉलोनाइजर या निजी लोग अपनी जमीन पर प्लाटिंग करना चाहते हैं तो यही आवेदन देते हैं। विभाग के अफसर ले-आउट देखने करने स्पॉट पर नहीं जाते। प्लाटिंग करने वाले को ही दफ्तर में बुलाया जाता है। बड़ी मिलीभगत कर नक्शा टेबल पर बैठकर पास कर दिया जाता है। नक्शा पास होने के बाद तय ले-आउट के तहत काम हो रहा है या नहीं इसकी भी जांच नहीं की जाती। इस वजह से प्लाटिंग करने वाले अपनी मर्जी से प्लॉट की बिक्री करते हैं। ले-आउट में जो निर्माण जहां करना है उस तय जगह पर नहीं किया जाता। कुछ बड़े बिल्डरों का इस विभाग में इतना दखल है कि वे जैसा चाहते हैं वैसा ले-आउट पास करवा लेते हैैं। जिन पर रोकने की जिम्मेदारी, उनके अपने-अपने तर्क भास्कर वहां पहुंचा, जहां अवैध प्लॉटिंग हो रही बोरियाखुर्द-काठाडीह रोड में
रिपोर्टर : प्लॉट खरीदना है, क्या रेट है?
एजेंट : कितने बजट तक चलेगा आपको?
रिपोर्टर : 10 लाख के अंदर, 800-900 वर्गफीट का रेट चलेगा।
एजेंट : 850 रुपए वर्गफीट पर बढ़िया लोकेशन में प्लॉट मिलेगा।
रिपोर्टर : ले आउट पास है या नहीं?
एजेंट : ले आउट तो नहीं है, लेकिन डायवर्सन है। रिपोर्टर : ले आउट नहीं है तो मकान कैसे बना पाएंगे?
एजेंट : निगम से नक्शा पास नहीं होगा, लेकिन मकान बना सकते हैं। डूंडा रोड में
रिपोर्टर: प्लाट है क्या, किस रेट पर मिलेगा?
एजेंट: 650 से शुरू है, लोकेशन के हिसाब से रेट बढ़ेगा।
रिपोर्टर : डायवर्टेड है या नहीं?
एजेंट : डायवर्सन नहीं है, लेकिन हो जाएगा।
रिपोर्टर : इस इलाके में निगम की कार्रवाई चली है, कोई दिक्कत तो नहीं होगी।
एजेंट : नहीं… नहीं। निगम की कार्रवाई चलती रहती है। खरीदी-बिक्री थोड़े रुक जाएगी। रिपोर्टर : रजिस्ट्री में कोई गड़बड़ी तो नहीं होगी?
एजेंट : रजिस्ट्री होगी न, हम कराकर देंगे रजिस्ट्री।


