अवैध बजरी का मामला:बनास नदी; 9 में से 5 बजरी लीज खत्म, पर खनन चालू है

यह तस्वीर नदी में अवैध बजरी दाेहन की भयावता दिखाने के लिए काफी है। बनास नदी में जहां तक नजर जाएगी, सिर्फ ये पत्थर नजर आएंगे। बिना लीज के नदी से पूरी तरह रेत निकाल ली गई। सिर्फ बहाव के साथ आए पत्थर रह गए। तस्वीर मंगराेप के पास की है, लेकिन नजारा जिले में बनास के पूरे बहाव क्षेत्र में ऐसा ही है। माफिया इस कदर हावी है कि जिले में 9 में से 5 जगह बजरी लीजें खत्म हाे चुकी फिर भी धड़ल्ले से अवैध खनन चल रहा है। शाहपुरा, आसींद, रायपुर, सहाड़ा में लीज है, लेकिन इनमें अधिकांश जगह काम बंद है। रायपुर में लीज है लेकिन वैध रूप से बजरी नहीं निकाली जा रही। बाकी जगह बजरी की काेई लीज नहीं है। भास्कर टीम मंगरोप, बड़लियास, हमीरगढ़, मांडलगढ़ क्षेत्र में पहुंची। यहां खुलेआम पॉकलेन, डंपर लगाकर अवैध बजरी निकाली जा रही है। जिले के बाहर जहां लीज है, वहां का रवन्ना लगाकर यहां से अवैध खनन किया जा रहा है। इसमें कई बड़े नेता भी शामिल है। खान विभाग ने ऐसे 51 पाइंट चिन्हित किए हैं, जहां बजरी के कारण माहौल बिगड़ने की आशंका है। जिले में बजरी की एक दर्जन से ज्यादा गैंग बन चुकी हैं, अफसरों पर हमले हो चुके हैं। नीलामी का खेल – माफिया सिर्फ ऊंची बाेली लगा रहे, राशि जमा नहीं कराते
सरकार ने पहले तहसीलवार बजरी की लीज दे रखी थी। लीज खत्म हुई ताे साै-साै हेक्टेयर के प्लाॅट बनाकर नीलामी रखी। पहले 11 हजार 448.05 हैक्टेयर एरिया में लीजें थी जिनसे सरकार काे करीब 50 कराेड़ का राजस्व मिलता था। जब सरकार ने साै-साै हेक्टेयर के प्लाॅट बनाए ताे लाेगाें ने इन छाेटे एरिया में भी साै से दाे साै कराेड़ की बाेली लगा दी। जब पैसे जमा कराने की बारी आई ताे इन कंपनियाें ने पैसा ही जमा नहीं कराया। इससे इन कंपनियाें के 40 लाख रुपए डूबे लेकिन फील्ड में अवैध खनन जारी रहा। भीलवाड़ा में ऐसा तीन बार की नीलामी में हाे चुका है लेकिन काेई भी सफल नहीं हुई। जहां बजरी माफिया पहुंचे वहां नदियों के कुएं दफन
भास्कर टीम ने बनास के 30 किमी बहाव क्षेत्र के हालत देखे। मंगराेप, महेशपुरा, पीपली, खातीखेड़ा, पाटनियां, कल्याणपुरा, कलुंदिया और हमीरगढ़ का कान्याखेड़ी बजरी दाेहन के हाॅट स्पाॅट दिखे। माफिया नदी में पाेकलेन, जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर से बजरी दाेहन कर रहे थे। रास्ते में बड़े गड्ढे यहां से लगातार गुजरे रहे डंपर, पॉकलेन की गवाही देते हैं। बजरी इस कदर निकाली जा चुकी है कि नदी के किनारे पर स्थित कुएं दफन हो गए।

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