अवैध संचालित हो रहे ईंट-भट्टे:20 किलोमीटर में 190 ईंट-भट्टे, इनमें 170 अवैध, जो वैध उन्होंने 3 मीटर की जगह 10 तक खोदा

जयपुर शहर के आसपास अवैध संचालित ईंट भट्टों का गढ़ बन गया है। इकोलॉजिकल जोन कानोता, बस्सी, नायला, रिहायशी रेनवाल-मांझी, मोहब्बतपुरा, बासड़ी जोगियान यानी 20 किमी की रेडियश में 190 के करीब ईंट भट्टे संचालित हैं, इनमें 170 से ज्यादा अवैध हैं। इनमें ज्यादातर बिना भू-रूपांतरण के कृषि भूमि पर संचालित हैं और खनन के साथ पर्यावरण नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। केन्द्रीय पर्यावरण वन और जलवायु, परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण नियमों की पालना करवाने के लिए पिछले साल सभी ईंट भट्टों को जिग-जैग तकनीक होने पर संचालन की परमिशन का नियम लागू किया था। हाल में जिग-जैग तकनीक के लिए 16 माह समय बढ़ा दिया, लेकिन एक साल में केवल एक-दो भट्टों ने यह तकनीक अपनाई है। एनजीटी ने पर्यावरण नियमों की अवहेलना करने वाले भट्टों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड चेतावनी ही दे रहा है। नायला, बस्सी, कानोता में सबसे ज्यादा 85 भट्टे, 80 अवैध राजधानी में सबसे ज्यादा ईंट भट्टे इकोलॉजिकल जोन नायला, बस्सी, कानोता में चल रहे हैं। इस इलाके में करीब 117 भट्टे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस क्लस्टर में ईंट भट्टे बिना वैध अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय के चल रहे हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में बताया कि क्षेत्र में इस इलाके में 117 ईंट भट्टे स्थापित हैं, इनमें से 27 ईंट भट्टे बंद हैं और 90 ईंट भट्टे चालू हालत में हैं। इनमें से केवल 5 ईंट भट्टों का संचालन भूमि रूपांतरण कर किया जा रहा है, शेष 85 ईंट भट्टे बिना उचित भूमि रूपांतरण के कृषि भूमि पर स्थापित हैं। इसके अलावा रेनवाल मांझी, मोहब्बतपुरा, बासड़ी जोगियान में 80 से 90 अवैध भट्टे संचालित है। यह है नियम: वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (जिसे इसके बाद वायु अधिनियम कहा जाएगा) की धारा 21 और 22 के प्रावधानों के तहत प्रावधान है कि कोई भी राज्य बोर्ड की पूर्व सहमति के बिना, किसी भी वायु प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र में औद्योगिक संयंत्र स्थापित या संचालित नहीं करेगा, राज्य बोर्ड के मानकों से अधिक वायु प्रदूषक का उत्सर्जन नहीं करेगा अवैध खुदाई कर रहे : ईंट भट्टों को माइनिंग विभाग से 3 मीटर तक की खुदाई की परमिशन है, लेकिन बिना परमिशन चल रहे भट्टों के आसपास 5 से 10 मीटर तक अवैध खुदाई की जा रही है। इकोलॉजिकल जोन में रिहायशी कॉलोनी तक बसाने पर प्रतिबंध है लेकिन कानोता, बस्सी, नायला, सामरिया रोड पर अवैध ईंट भट्टें पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है।

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