आयुर्वेदिक दवाओं के लिए चूहा, खरगोश और गिनीपिग जैसे जानवरों पर न केवल दर्द भरा क्लिनिकल ट्रायल बल्कि उनको मौत के मुंह में नहीं जाना पड़ेगा। क्लिनिकल ट्रायल के दौरान जानवरों के दिल, दिमाग, लिवर, लंग्स, किडनी ओर बोन्स की 3-डी इमेज के माध्यम से औषधियों के बाद कोशिकाओं में होने वाले बदलाव का अध्ययन करना भी आसान होगा। ये ही नहीं हृदय, लिवर, अस्थि एवं गुर्दे रोग से संबंधित बीमारियों के लिए वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणिक आयुर्वेदिक दवाओं की खोज करना भी आसान होगी। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्वविद्यालय जयपुर के ड्रग रिकवरी एंड डवलपमेंट यूनिट में पांच करोड़ रुपए लागत की माइक्रो सिटी मशीन स्थापित की है। जिसे माइक्रो कम्प्यूटेड टोमोग्राफी के नाम से भी जाना जाता है। जिसका स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। भास्कर EXPLAINER – वो जो आप जानना चाहते हैं ऐसे काम करेगी मशीन : माइक्रो सिटी मशीन पर एक तरह से सेल इमेजिंग सिस्टम है। मशीन में ले जाने से पहले जानवर को बेहोश किया जाता है। उसके बाद में जानवर को स्कैनिंग मशीन पर लेटाकर विभिन्न अंगों का अध्ययन किया जा सकता है। करीबन एक घंटे बाद फिर से रिकवर हो सकेगा। संस्थान के पास जानवरों पर क्लिनिकल ट्रायल के लिए लाइसेंस ले रखा है। मौजूदा स्थिति में बेजुबान जानवरों को दर्दभरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में मौत भी हो जाती है। नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी में भी माइक्रो सिटी मशीन लगी है। जहां पर विभिन्न तरह की जांचे की जा रही है। (भास्कर एक्सपर्ट पैनल : डॉ. सुदीप्त रथ, विभागाध्यक्ष फार्माकोलॉजी विभाग, ड्रग रिकवरी एंड डवलपमेंट यूनिट के प्रभारी, एनआईए जयपुर) आधुनिक मशीन का शुभारंभ केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री 8 फरवरी को करेंगे: केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जादव संस्थान में लगी माइक्रो सिटी मशीन का 8 फरवरी को शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर राज्य के डिप्टी सीएम डॉ.प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा और विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज समेत अनेक अधिकारी उपस्थित रहेंगे।


