अशोकनगर में ओबीसी महासभा ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। महासभा ने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को सामाजिक सुरक्षा, न्याय और संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने की मांग की। इस दौरान, प्रतिनिधियों ने एसडीएम बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें ओबीसी समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख मांगें रखी गईं। प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग करना था। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर संत आनंद स्वरूप द्वारा की गई कथित विवादित टिप्पणी का विरोध और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को उजागर करना भी शामिल था। ज्ञापन में प्रमुख रूप से पिछड़ा वर्ग अत्याचार निरोधक अधिनियम बनाने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य ओबीसी समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। महासभा ने समाज में वैमनस्य फैलाने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कठोर कार्रवाई की भी मांग की। महासभा ने तथाकथित संत आनंद स्वरूपानंद द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव (जो स्वयं ओबीसी वर्ग से आते हैं) उन पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरुद्ध एनएसए के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण की सीमा को वर्तमान 13 प्रतिशत से बढ़ाकर संविधान सम्मत 27 प्रतिशत लागू करने और रुकी हुई नियुक्तियों को जल्द शुरू करने की भी मांग की गई। साथ ही, देशभर में जातिगत जनगणना कराने की अपील की गई ताकि सभी वर्गों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार मिल सकें। महासभा ने ज्ञापन में कहा कि संविधान लागू होने के 75 वर्षों बाद भी ओबीसी समुदाय को समान अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए कई स्तरों पर संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि समय-समय पर समाज में कुछ ताकतें सामाजिक सौहार्द और संविधान की मर्यादाओं को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। ओबीसी महासभा ने प्रशासन से इन मुद्दों पर त्वरित संज्ञान लेकर ठोस और संवैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की मूल भावना को मजबूती मिलेगी। साथ ही कोतवाली थाना प्रभारी रवि प्रताप चौहान को भी एफआईआर दर्ज कराने की मांग का ज्ञापन दिया गया।


