अशोकनगर जिले के महोली गांव में किसान की आत्महत्या के मामले में प्रशासन ने जांच रिपोर्ट जारी की है। इसमें सामने आया है कि किसान ने फसल बर्बादी या कर्ज के कारण नहीं, बल्कि बीमारी से तंग आकर जान दी है। प्रशासन के मुताबिक, किसान पिछले 10 साल से पेट संबंधी गंभीर बीमारी और कुछ समय से मानसिक परेशानी से जूझ रहा था। ग्राम महोली निवासी शिवराज सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह दांगी ने 1 फरवरी को अपने खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा थी कि ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने और कर्ज के कारण किसान ने यह कदम उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पटवारी और सहायक कृषि विस्तार अधिकारी की संयुक्त टीम से जांच करवाई। जांच में सभी फसलें सुरक्षित मिलीं संयुक्त दल ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि किसान की सभी फसलें पूरी तरह स्वस्थ थीं और उनमें किसी भी प्रकार की क्षति नहीं हुई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फसल नुकसान की बात पूरी तरह निराधार है। परिवार के पास 5 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन रिपोर्ट के मुताबिक, किसान और उसके परिवार के नाम महोली गांव में कुल 5.472 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है। इसमें चना, मसूर, गेहूं सहित अन्य फसलें बोई गई थीं, जो सामान्य अवस्था में पाई गईं। किसान के स्वयं के नाम 0.712 हेक्टेयर भूमि थी और गांव में उसका पक्का मकान भी है। मिल रहा था सरकारी योजनाओं का लाभ जांच में सामने आया कि किसान और उसके एक पुत्र को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा था। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा भी उपलब्ध थी। प्रशासन ने निष्कर्ष निकाला है कि आत्महत्या का मुख्य कारण आर्थिक संकट नहीं, बल्कि दीर्घकालिक शारीरिक बीमारी और मानसिक परेशानी है।


