भास्कर न्यूज | हजारीबाग जिले के ग्वाल टोली निवासी बजरंगी यादव के जीवन में वह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था, जब 25 वर्षों से चली आ रही गंभीर बीमारी से उन्हें छुटकारा मिला। बजरंगी यादव लंबे समय से अस्थमा, हृदय में ब्लॉकेज और दाहिने हिस्से में लकवा से पीड़ित थे। बीमारी की वजह से वे चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गए थे साथ ही उनके फेफड़े मे जमे हुए बलगम के कारण काफी बदबू भी आ रही थी। वर्षों तक विभिन्न दवाइयों और इलाज का सहारा लेने के बावजूद उनकी स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो पाया। ऐसे कठिन दौर में उन्हें कुश क्रांति दर्शी योग सह वैकल्पिक चिकित्सालय में लाया गया। चिकित्सालय में विशेष पद्धति से शुरू हुए इलाज का असर पहले ही दिन से दिखने लगा। केवल छह दिनों के अंदर उन्होंने अपनी बीमारियों से निजात पा ली और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह रामगढ़ जिले के चैनपुर निवासी लीलावती देवी, जो करीब 10 वर्षों से अस्थमा से जूझ रही थीं और सुबह-शाम इन्हेलर का सहारा लेती थीं, उन्होंने भी छह दिनों के उपचार के बाद बीमारी से मुक्ति पा ली। चिकित्सालय के संचालक मनोज कुमार कुशवाहा ने जानकारी दी कि यहां ऋषि-मुनियों की परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग कर इलाज किया जाता है। इसमें न तो सुई का प्रयोग होता है और न ही किसी प्रकार की कोई दवाई का सेवन करना पड़ता है। इस पद्धति से मरीजों को तुरंत और प्रभावी लाभ मिलता है तथा किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं होता। बताया कि चिकित्सालय में अब तक कई मरीज लकवा, सर्वाइकल, साइटिका, घुटना व जोड़ों का दर्द, गठिया, माइग्रेन, अनिद्रा, पेट संबंधी रोग, त्वचा रोग, किडनी व लीवर की समस्या, आंखों की बीमारियां, रक्तचाप, शुगर, अस्थमा, महिला संबंधी रोग, मोटापा व लंबाई से जुड़ी समस्याओं से ठीक हुए हैं।


