जिले में माैसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। फरवरी माह में बार-बार माैसम परिवर्तन होने के कारण रोजाना चार हजार से अधिक मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसी माह के 22 दिन में शनिवार शाम तक 76 हजार 35 मरीज पहुंच चुके हैं। इनमें से डाॅक्टराें की ओर से जांच के बाद 3646 मरीजाें काे भर्ती किया जा चुका है। वहीं फरवरी 2024 के 22 दिन में 70461 मरीजाें की ओपीडी में जांच हुई और 3533 मरीजाें काे भर्ती किया गया है। अस्पताल आने वाले 85 से 90 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार, निमाेनिया, खांसी, जुकाम, सिर दर्द व बदन दर्द के आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र हाे या जिला मुख्यालय हर घर में दाे से तीन मरीज माैसमी बीमारियाें की जकड़ में है। अस्पताल में दाे नए मेडिकल वार्ड खुलने के बावजूद भी मरीजाें की बढ़ती तादाद के चलते अस्पताल प्रशासन काे गैलेरियों में बैड लगाने की नोबत अा गई है। इस बार नाॅर्मल दवाइयों से मरीजाें के खांसी, बुखार ठीक नहीं हाे रहे हैं। अस्पताल में 6-7 दिन भर्ती रहने के बाद स्वस्थ हुए मरीज भी दाेबारा ओपीडी में जांच के लिए पहुंच रहे हैं। एमसीएच विंग में बैड कम हाेने से एक पर दाे से तीन बच्चाें का इलाज चल रहा है। इमरजेंसी में भी राेजाना 250 से अधिक मरीज आ रहे हैं। डे-केयर वार्ड में राेजाना 60 से 70 मरीजाें काे ड्रीप चढ़ाने के बाद डिस्चार्ज किया जा रहा है। सुबह से 8 बजे से कतारें, 60 फीसदी मरीजाें के एक्स-रे जांच अस्पताल में सुबह 8 बजे से पर्ची काउंटर, डाॅक्टर ओपीडी रूम, ब्लड कलेक्शन सेंटर, जांच लेने के लिए कतारें लगनी शुरू हाे जाती है। मेडिकल ओपीडी में भी अस्पताल प्रशासन की ओर से 6 डाॅक्टराें की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद मरीजाें काे जांच के लिए घंटाें इंतजार करना पड़ रहा है। डाॅक्टराें की ओर से 50 से 60 फीसदी मरीजाें के चेस्ट एक्स-रे जांच लिखी जा रही है। काेविड के बाद पहली बार इस महीने मरीजाें की इतनी लंबी कतारें लगी है। अधिकतर मरीजाें के सीबीसी व एक्स-रे जांच करवाई जा रही है। वायरल निमाेनिया के संक्रमित हाेने से मरीजाें की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। अस्पताल ही नहीं, जिले भर के अस्पतालों के यही हाल है। एक्स-रे की पिक्चर साफ नहीं, डाॅक्टर असमंजस में अस्पताल की ओपीडी 4 हजार से अधिक हाेने के साथ ही एक्स-रे मशीन में पिछले दाे महीने से खराबी चल रही है। डाॅक्टराें की ओर से 50-60 मरीजाें के एक्स-रे जांच करवाई जा रही है लेकिन जांच में पिक्चर क्लियर नहीं हाेने के साथ लाइनिंग आ रही है। समस्या भी पिछले दाे महीने से लगातार बनी है। ऐसे में डाॅक्टर मरीज की रिपाेर्ट के आधार पर सटीक इलाज नहीं कर पा रहे हैं। डाॅ. अनिल सेठिया ने बताया कि वायरल बुखार के मरीजाें की संख्या लगातार बढ़ रही है।


