छोटा लेकिन सुंदर भवन। खेलने के लिए छोटा सा मैदान। दीवार पर टंगे एलईडी टीवी पर सीख देने वाली कार्टून कहानियां चल रही हैं। परिसर में खेल के सामान लगे हैं। सभी बच्चे ड्रेस में हैं स्वेटर और जूते-मोजे पहने हुए। बैठने की बेहतरीन व्यवस्था है। क्लास रूम में छोटी-छोटी रंगीन कुर्सियां और छोटे टेबुल हैं । दीवारों पर महापुरुषों की तस्वीरें लगी हैं। गिनती और पहाड़े भी लिखे हुए। पोषण वाटिका में उपजी ताजी सब्जी से बना उन्हें भोजन मिल रहा है ।यह दृश्य किसी बड़े और निजी विद्यालयों की नहीं, बल्कि झारखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों की है। इन केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र का नाम दिया गया है। ऐसे 6850 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। दूसरे चरण में कुल 4185 आंगनबाड़ी केंद्रों को इसके अंतर्गत लाया जाएगा। -शेष पेज 13 पर बिजली सप्लाई और आरओ वाटर की व्यवस्था : सभी केंद्रों में बिजली सप्लाई और आरओ वाटर की व्यवस्था की जा रही है। बच्चों के खेल कूद के लिए सक्षम किट जैसे-कैरमबोर्ड, सॉफ्ट बॉल, व्हाइट बोर्ड दिया जा रहा है। वर्षा जल के संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनाई जा रही है। दीवार पर 10 प्रकार के वाल पेपर के माध्यम से बच्चों को पाठशाला पूर्व शिक्षा भी दी जा रही है। सभी केंद्रों को दीवार घड़ी दी जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र के रूम में बैठे बच्चे। आदिम जनजातीय क्षेत्रों में खुलेंगे आंगनबाड़ी केंद्र
आदिम जनजातियों की 100 की जनसंख्या वाले पोषक क्षेत्रों में भी आंगनबाड़ी केंद्र खुलेंगे। 12 लाख रुपए की लागत से भवन बनाए जाएंगे। अपना भवन बनने तक किराए के मकान में केंद्र चलेगा। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों में एक आंगनबाड़ी सेविका और एक सहायिका का चयन होगा। भवन निर्माण पर पूरा खर्च केंद्र सरकार करेगी, पर अन्य खर्चों में केंद्र सरकार और राज्य सरकार का अनुपात 60:40 को होगा।


