आईआईएम इंदौर के निदेशक बोले- मनुस्मृति से बनाएं नीतियां:सोशल मीडिया पर डाला VIDEO, महाभारत और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया

इंदौर आईआईएम (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) के निदेशक डॉ. हिमांशु राय ने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने मनु स्मृति का उदाहरण देते हुए नीतियां बनाए जाने का जिक्र किया है। डॉ. राय ने 1 मिनट 46 सेकंड के वीडियो में शासन और उसकी नीतियां धर्म के अधीन होने की बात कही है। वे वीडियो के आखिरी में लोगों को राय देने के लिए कह रहे हैं। इसके बाद यूजर तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। पहले ये जानिये डॉ. राय ने अपने वीडियो में क्या कहा… आज नीतियां बनने में देर नहीं लगती, कुछ आंकड़े, कुछ बैठकें और नीति तैयार। पर प्रश्न ये है कि क्या ये नीति केवल शासन का साधन है? या सेवा का संकल्प? हमारे प्राचीन ग्रंथ जैसे कौटिल्य का अर्थशास्त्र, मनुस्मृति, महाभारत का शांति पर्व, यह स्पष्ट करते हैं कि राजा का पहला धर्म प्रजा की रक्षा और सम्यक नीति है। राजा धर्मेण पालय:, प्रजा: पालयति। अर्थात राजा यदि स्वयं धर्म के अधीन हो, तभी प्रजा निर्भय रह सकती है। आज जब हम पारदर्शी शासन, डिजिटल गवर्नमेंट और नागरिक भागीदारी की बात करते हैं, तब हमें यह आत्म मंथन करना होगा कि क्या हमारी नीति एक्सेल शीट से निकल रही है या अंत:करण से। क्या यह समय नहीं है कि हम शासन को फिर से दर्शन से जोड़ें! नीति केवल नियम ना हो, वह मूल्य हो। शासन की हर योजना, हर दिशा निर्देश सत्ता की सुविधा नहीं, समाज की चेतना से उपजे। उन्होंने कहा कि नीति ऐसी हो जो सिद्धांत से प्रेरित हो, ना कि सुविधा से। और सबसे अहम बात नीति केवल तात्कालिक लोकप्रियता का साधन न बने, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करे। अब प्रश्न ये है कि क्या हम ऐसे भारत के लिए तैयार हैं? जहां शासन वैज्ञानिक नहीं बल्कि नैतिक भी हो। यूजर बोले- शासन को केवल रणनीति से नहीं, बल्कि धर्म से भी संचालित करने का समय आ गया है। धर्म से मेरा मतलब है नैतिकता, न्याय, और सहानुभूति जैसे मूल्यों से। हेमंत कासट नामक यूजर ने कहा – बिल्कुल! नीति और राष्ट्र की दिशा तय करने में आंकड़ों और रणनीति की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन अंततः राष्ट्र का संचालन उसके नागरिकों के अंत:करण और मूल्यों से होता है। शासन को केवल रणनीति से नहीं, बल्कि धर्म से भी संचालित करने का समय आ गया है। धर्म से मेरा मतलब है नैतिकता, न्याय, और सहानुभूति जैसे मूल्यों से। जब शासन इन मूल्यों को अपनाता है, तो वह समाज को एक दिशा देता है और नागरिकों को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट करता है…! इस दिशा में कुछ सुझाव हैं: इन मूल्यों को अपनाकर, हम एक बेहतर समाज और राष्ट्र बना सकते हैं…!

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