सिंगरौली जिले की कंचन नदी एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में आ गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनी और एनसीएल की गोरबी ब्लॉक खदान से कोयला और राख युक्त पानी लगातार नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे इसका पानी जहरीला हो रहा है। नौगढ़ गांव की निवासी रामकली यादव ने बताया कि यह समस्या कई सालों से बनी हुई है। उनके अनुसार, कंचन नदी ही गांव के लोगों के लिए पीने, नहाने और मवेशियों के उपयोग का एकमात्र जल स्रोत है। ग्रामीणों का कहना है कि गंदा पानी पीने से लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं और पशुओं में भी बीमारियां फैल रही हैं। इस गंभीर समस्या पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का पानी काला और बदबूदार हो गया है। इसके कारण रोजाना उपयोग के लिए भी यह पानी मुश्किल से मिल पा रहा है। औद्योगिक अपशिष्ट से नदी सुधार प्रभावित गौरतलब है कि हाल के महीनों में जिला प्रशासन ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कंचन नदी के सुधार और पुनर्जीवन के लिए कई कार्य किए थे। इनमें श्रमदान, गाद निकासी और जल प्रवाह बहाल करना शामिल था, जिससे नदी में पानी का बहाव फिर से शुरू हुआ था। हालांकि, औद्योगिक अपशिष्ट के कारण ये सभी प्रयास अब प्रभावित होते दिख रहे हैं। इस मामले में सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा उठाई गई समस्या उनके संज्ञान में आ गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इसकी जांच कराई जाएगी। कलेक्टर बैनल ने कहा कि यदि किसी भी कंपनी या खदान की लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण अब प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद कंचन नदी को प्रदूषण से मुक्त कराया जाएगा और उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान होगा।


