मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा का एक वीडियो सामने आने के बाद देशभर में रोष फैल गया है। वीडियो में उन्होंने ब्राह्मण समाज की बेटियों के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इस बात से न केवल ब्राह्मण समाज बल्कि पूरे सनातन समाज में गुस्सा है। लोगों ने इसे मर्यादा और सामाजिक सम्मान के खिलाफ बताया है। चित्तौड़गढ़ में सामाजिक संगठनों ने सौंपा राष्ट्रपति को ज्ञापन इस घटना के विरोध में चित्तौड़गढ़ में विप्र फाउंडेशन और कई सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला कलेक्ट्रेट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक को दिया गया। ज्ञापन देते समय समाजजन मौजूद रहे और कार्रवाई की मांग की। अधिकारी पर सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक भाषा का आरोप संगठनों का कहना है कि वायरल वीडियो में संतोष वर्मा, जो अजाक्स संस्था के प्रदेश अध्यक्ष भी बताए जा रहे हैं, ने सार्वजनिक मंच से बेहद असंयमित और अशोभनीय भाषा का उपयोग किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी समाज की बेटियों का अपमान है और इससे लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी की टिप्पणी बेहद गंभीर बताई ज्ञापन में कहा गया है कि एक संवैधानिक पद पर आसीन अधिकारी द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाता है। यह समुदायों के बीच नफरत फैलाने और राष्ट्रीय एकता कमजोर करने वाला कदम माना जाना चाहिए। संगठनों ने इसे “गंभीर सामाजिक अपराध” बताया। विप्र फाउंडेशन ने तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि संतोष वर्मा को तुरंत पद से हटाया जाए। संगठन ने कहा कि कानून के तहत उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि भारत में नारी सम्मान के खिलाफ किसी भी तरह के व्यवहार की कोई जगह नहीं है। समाजजनों ने कहा—सरकार एकता बढ़ाए, ऐसे बयान तोड़ते हैं प्रबुद्धजनों ने कहा कि सरकार सामाजिक समरसता और अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा दे रही है, ताकि समाज मजबूत बने। लेकिन अधिकारी के ऐसे बयान समाज में अविश्वास और तनाव पैदा करते हैं। लोगों ने कहा कि ऐसे वक्तव्य भविष्य में सामाजिक अशांति को जन्म दे सकते हैं। अधिकारी के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जोरदार मांग सभी जनों ने कहा कि संतोष वर्मा के खिलाफ तुरंत और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकना जरूरी है, ताकि समाज में शांति, सम्मान और एकता कायम रहे। समाजजन चाहते हैं कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषी को कड़ी सजा मिले।


