मोन ग्यारस के पावन दिन पर सोमवार को आचार्य उदयवल्लभसुरीजी महाराज साहब और ह्रदयवल्लभसुरीजी म. सा. आदि 28 संतों के साथ पावापुरी तीर्थ जीव मैत्री धाम पहुंचे। मुख्य द्वार पर ट्रस्ट मंडल ने गाजे-बाजे के साथ उनका भव्य स्वागत किया। आचार्य की निश्रा में 5 दिसंबर 2025 से 26 जनवरी 2026 तक 47 दिवसीय भव्य उपधान तप की आराधना होगी, जिसकी तैयारियां की जा रही हैं। यह उपधान तप आचार्य के परम भक्त माता मंजुला बेन रमणलाल वाडीलाल शाह, आनंद मंगल परिवार, चाणस्मा (अहमदाबाद) द्वारा करवाया जा रहा है। उपधान में पहला प्रवेश 5 दिसंबर को और दूसरा प्रवेश 7 दिसंबर को होगा। उपधान तप का अर्थ है 46 दिनों तक साधु-साध्वी के जीवन का प्रशिक्षण लेना। इस तप के दौरान तपस्वी उपवास, आयम्बिल, एकासना और पोषध करते हैं तथा स्नान नहीं करते। उपधान की क्रिया पूरी करने के बाद ही वे उबला हुआ जल ग्रहण करते हैं और सुबह-शाम प्रतिक्रमण करते हैं। जैन धर्म में ऐसे तीन उपधान किए जाते हैं, जिसके बाद आचार्यश्री तपस्वी को मोक्ष माला पहनाते हैं। आचार्य के आगमन पर मुख्य द्वार पर पावापुरी तीर्थ के प्रबंधक सुरेंद्र जैन, परेश भाई ठार, पिंकेश भाई, विकास भाई, रुषभ भाई, राजू भाई और पावापुरी स्टाफ ने उनका वंदन कर आशीर्वाद लिया। आचार्य भगवंतों ने परमात्मा शंखेश्वर पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी के दर्शन वंदन किए।
उन्होंने पावापुरी में निर्माणाधीन आचार्य भगवंत मेघवल्लभसुरीजी म. सा. के स्मृति मंदिर का निर्माण कार्य भी देखा, जिसकी प्रतिष्ठा 1 फरवरी 2026 को होगी। ट्रस्ट मंडल ने आचार्य मेघवल्लभसुरीजी का काल धर्म पावापुरी में होने के कारण यह स्मृति मंदिर बनाने का निर्णय लिया था, जिसका कार्य प्रगति पर है।


