भास्कर संवाददाता | पाली जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण शनिवार को दो दिवसीय प्रवास पर सिरियारी पहुंचे। आचार्य तेरापंथ की स्थापना से जुड़े प्रमुख स्थलों के आध्यात्मिक स्पंदन के बाद धर्मसंघ के प्रवर्तक आद्य अनुशास्ता आचार्य भिक्षु की महाप्रयाण स्थली सिरियारी में विराजमान हुए। समाधि स्थल परिसर स्थित भिक्षु समवसरण में प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि मनुष्य के भीतर अनेक भाव जगते हैं। कभी वह गुस्से में होता है तो कभी क्षमाशील दिखाई देता है। कभी अहंकार की भाषा बोलता है तो कभी विनम्रता से युक्त होता है। लोभ, त्याग, छल और सरलता इन सभी विपरीत भावों का संगम एक ही व्यक्ति में देखा जा सकता है। विजय नाहर द्वारा लिखित पुस्तक इतिहास एवं विरासत का लोकार्पण आचार्य के सान्निध्य में किया। कंटालिया में रहेगा अधिक प्रवास : आचार्य ने बताया कि इस वर्ष आचार्य भिक्षु का 300वां जन्म वर्ष मनाया जा रहा है। वे भगवान महावीर की परंपरा के आचार्य और तेरापंथ के प्रथम आचार्य थे। इस बार उनके जन्मस्थल कंटालिया में सिरियारी की अपेक्षा अधिक प्रवास रहेगा। आचार्य ने कहा कि माता दीपांबाई को सिंह का स्वप्न आया था, जो साहस और निर्भीकता का प्रतीक माना जाता है। आचार्य भिक्षु ज्ञान, प्रज्ञा और जिनवाणी भक्ति के धनी थे। इस धाम में हमारे आगमन से धर्म और अध्यात्म की प्रेरणा निरंतर मिलती रहे। साध्वी ज्ञानवती की स्मृतिसभा आयोजित : आचार्य के सान्निध्य में साध्वी ज्ञानवतीजी (लाडनूं) की स्मृतिसभा भी आयोजित हुई। आचार्य ने उनका जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए आत्मा के ऊर्ध्वगमन की मंगलकामना की। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा, मुख्यमुनि महावीरकुमार, साध्वी श्रुतयशा, साध्वी सम्बुद्धयशा, मुनि गिरिशकुमार, मुनि चेतनकुमार व मुनि धर्मेशकुमार ने भी भावाभिव्यक्ति दी।


