आजीविका मिशन का हौसलों की उड़ान कार्यक्रम आयोजित:कलेक्टर बोले- आज ड्रोन दीदी, कृषि सखी जैसी पहल से महिलाओं को सशक्त बना रही हैं

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत नई चेतना 4.0 जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान के तहत “हौसलों की उड़ान” कार्यक्रम का आयोजन सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र में किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत लखपति दीदी संवाद, पतंग महोत्सव, गुड़-तिल सभा और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक सोनू सुशीला यादव ने बताया कि कार्यक्रम में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत अभिषेक दुबे, आजीविका मिशन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे। कलेक्टर ने कहा कि प्रारंभ में लाभ कम हो सकता है, किंतु निरंतर परिश्रम से धीरे-धीरे आय और लाभ में वृद्धि होती है। उन्होंने जिले में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज ड्रोन दीदी, कृषि सखी जैसी पहल से महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। आत्मनिर्भरता के साथ-साथ महिलाएं समाज और जिले का नाम भी रोशन कर रही हैं। स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कलेक्टर ने महिलाओं से नियमित योग एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहकर ही व्यक्ति अपने परिवार, समाज और स्वयं के लिए बेहतर कार्य कर सकता है। कार्यक्रम में महिला समूह सदस्यों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए। सोना खन्ना ने बताया कि उन्होंने “खुशी” नामक समूह बनाकर अब तक लगभग 500 महिलाओं को हस्ताक्षर करना सिखाया है तथा उनका लक्ष्य 1000 महिलाओं को साक्षर बनाना है। सविता कश्यप ने जैविक खेती के अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रारंभ में लोगों ने मजाक उड़ाया, किंतु आज एग्रीकल्चर मास्टर ट्रेनिंग प्राप्त कर वे लगभग 125 कृषकों के साथ दो बीघा भूमि में जैविक खेती पर काम कर रही हैं। किरण अहिरवार ने बताया कि सीमित शैक्षणिक योग्यता के बावजूद आजीविका मिशन से जुड़कर विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त किए, प्राकृतिक कृषि औषधियां तैयार करना सीखा तथा नमो ड्रोन दीदी पायलट प्रशिक्षण लेकर ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का कार्य कर रही हैं। इसके साथ अन्य समूह की महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किया। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर द्वारा सभी समूह की महिलाओं को तिल एवं गुड़ के लड्डू वितरित किए गए।

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