प्रयागराज में महाकुंभ के पहले सभी अखाड़ों की पेशवाई (छावनी प्रवेश) निकल रही है। आज 8 जनवरी को तीन अखाड़ों की पेशवाई एक साथ निकलेगी। इसमें तीनों अनि अखाड़े शामिल होंगे। श्री निर्वाणी अनि अखाड़ा, श्री निर्मोही अनि अखाड़ा और श्री दिगंबर अनि अखाड़े के जगदगुरु, महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत और नागा संन्यासी एक साथ महाकुंभ के प्रवेश करेंगे। भव्य यात्रा मेडिकल कॉलेज चौराहे के पास स्थित केपी कॉलेज के पास से महाकुंभ मेले के लिए रवाना होगी। दिगंबर अनि अखाड़े के महामंडलेश्वर सरयू दास महराज ने बताया कि तीनों अखाड़ों के संत पूरी भव्यता से महाकुंभ के लिए रवाना रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में रथ, बग्घी, हाथी घोड़े पर सवार होकर साधु संत चलेंगे। बता दें कि अभी तक 7 अखाड़ों की पेशवाई हो चुकी है। श्रीहनुमान हैं इनके इष्टदेव, भगवा है धर्मध्वजा
दिगंबर अनि अखाड़े के साधु संतों की पहचान उनके सफेद कपड़े, तिलक व जटा जूट से होती है। एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में भाला लेकर चलते हैं। यह मठ, मंदिर और सनातन की रक्षा के लिए मुगलों और अंग्रजों से लड़े थे। इनके इष्टदेव हनुमानजी हैं। इनकी धर्मध्वजा पर हनुमानजी विराजमान हैं। भगवान विष्णु के अनुयायी होते हैं ये संत
तीनों अनि अखाड़ों के संत भगवान विष्णु के अनुयायी होते हैं। दिगंबर अनि अखाड़े की स्थापना करीब 600 साल पहले धर्म की रक्षा के लिए अयोध्या में की गई थी। अनि का मतलब होता समूह या छावनी। निर्मोही और निर्वाणी अखाड़े दिगंबर अखाड़े के सहायक के रूप में होते हैं। इस अखाड़े में 2 लाख से ज्यादा संत मौजूद हैं।


