भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में मकर संक्रांति प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस पर्व का संबंध सूर्य भगवान से है और सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहा जाता है। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। साल 2026 में मकर संक्रांति के बाद 14 जनवरी से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि एकादशी के व्रत में चावल खाना प्रतिबंधित होता है। इसलिए इस साल लोगों के मन में खिचड़ी पर्व को लेकर बहुत दुविधा है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। इस दिन सफेद तिल का दान करें। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को चावल दान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन पानी में काले तिल और गंगाजल मिला कर स्नान करें। इससे सूर्य भगवान की कृपा होती है और कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर खाने में तिल का सेवन करना चाहिए। ये पर्व पितरों से संबंधित शुभ कर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठें। स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें और उन्हें नमस्कार करें।


