पंजाब के अजनाला थाने पर में IED लगाने के मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आतंकी हरप्रीत सिंह उर्फ हैपी पासिया से उसकी मां और बहन को जमानत दे दी है। अदालत ने आर्डर में साफ किया कि दोनों महिलाओं को साजिश से जोड़ने के लिए कोई स्वतंत्र सबूत उपलब्ध नहीं है और उनका नाम मुख्य आरोपी के सिर्फ संबंध के आधार पर जोड़ा गया प्रतीत होता है। इसी आधार पर जमानत दी गई। राज्य सरकार ने यह कहते हुए ज़मानत का विरोध किया कि मामला बेहद संवेदनशील है और उनकी रिहाई से ट्रायल प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने कहा कि दोनों महिलाएं साधारण गृहणियां हैं, उन्हें दबाव बनाने के लिए फंसाया गया है और इससे पहले जब उन्होंने हाई कोर्ट में सुरक्षा मांगी थी, तो राज्य ने खुद कहा था कि उनका किसी अपराध से कोई लेना-देना नहीं है।सभी पक्षों की बात सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि ट्रायल लंबा चल सकता है और हालात को देखते हुए जमानत देना ही ठीक है। ऐसे हुआ था सारा मामला यह मामला एक साल है। नवंबर 2024 जब अजनाला पुलिस थाने की बाहरी दीवार के पास बम जैसा दिखने वाली एक डिवाइस मिली थी। बम निरोधक दस्ते ने उस डिवाइस को निष्क्रिय किया था। जिसमें लगभग 750 ग्राम RDX होने की बात सामने आई थी। घटना वाले दिन के अगले ही दिन पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर हैपी पासिया की मां भूपिंदर कौर और उसकी बहन को सह-आरोपी के तौर पर गिरफ्तार कर लिया था। आरोप था कि दोनों महिलाओं ने उन दो युवकों को ठहरने की जगह और खाना दिया था, जिन पर शक था कि उन्होंने IED लगाया था। दोनों महिलाओं के बारे में सबूत नहीं जमानत मंज़ूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन) के पास दोनों महिलाओं के खिलाफ सिर्फ उनका खुद का खुलासा और सह-आरोपी के बयान ही हैं। अदालत ने कहा कि बिना किसी स्वतंत्र सबूत के, सह-आरोपी के बयान की कानूनी वैल्यू बहुत कम होती है। अदालत ने यह भी माना कि दोनों महिलाओं का कोई अपराध रिकॉर्ड नहीं है और न ही ऐसा कोई कारण सामने आया है जिससे लगे कि वह इस घटना में शामिल थीं। सबूतों से छेड़छाड़ नहीं हो सकती अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश हो चुका है और अब सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि बम फटा नहीं, किसी को चोट नहीं लगी और मुख्य आरोपी हैपी पासिया विदेश में गिरफ्तार है। ऐसे में सिर्फ़ सज़ा की तरह जेल में रखकर ज़मानत से इनकार नहीं किया जा सकता।


