नए साल के स्वागत में हुई आतिशबाजी और जश्न का असर अब भोपाल की हवा पर दिखाई दे रहा है। शहर के प्रमुख एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पीएम 2.5 का स्तर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है। हालात सिर्फ कणीय प्रदूषण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टीटी नगर क्षेत्र में ग्राउंड लेवल ओजोन (ओ3) की मात्रा बढ़ने से जहरीली गैसों का कॉकटेल (मिश्रण) बन रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है। दरअसल, राजधानी का औसत एक्यूआई गुरुवार को 240 रिकॉर्ड किया गया। जबकि, बीते साल एक जनवरी 2025 को यह आंकड़ा 143 पर था। इस तरह देखा जाए तो औसत एक्यूआई में बीते साल के मुकाबले 68 प्रतिशत से अधिक प्रदूषण बढ़ गया है। पीएम 2.5 और ओजोन का डबल अटैक पीएम 2.5 बेहद बारीक कण होते हैं, जो सीधे फेफड़ों के भीतर जाकर सूजन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। वहीं ओजोन दूसरा प्रदूषक है, जो धूप और प्रदूषक गैसों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। जब पीएम2.5 और ओ3 दोनों बढ़ते हैं, तब दमा, सीओपीडी और हृदय रोगियों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नए साल पर हुई आतिशबाजी, ठंडी रातों में हवा की कम रफ्तार, वाहनों का धुआं और खुले में जलने वाला कचरा-इन सबने मिलकर प्रदूषण को जमीन के पास ही रोक दिया। इसी वजह से गैसें और कण ऊपर नहीं जा पाए। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत परामर्श लेने की सलाह दी है।


