विदिशा पुलिस पंचायत ने बुजुर्गों से जुड़े तीन मामलों का तुरंत समाधान किया है। इनमें एक ऐसा संवेदनशील मामला भी शामिल है, जहां बेटे-बहू के घर से निकाले जाने के बाद आत्महत्या का विचार कर रहे एक बुजुर्ग दंपती को न्याय मिला। साप्ताहिक बैठक में इन मामलों की सुनवाई की गई। पहला केस पहले मामले में, एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग अपने परिचित को दिए गए 1.5 लाख रुपए वापस न मिलने से परेशान थे। सुनवाई के दौरान, अनावेदक ने तुरंत 50,000 रुपए लौटा दिए और शेष राशि एक महीने के भीतर चुकाने पर सहमति व्यक्त की, जिससे बुजुर्ग को राहत मिली। दूसरा केस दूसरा मामला एक वरिष्ठ नागरिक के मकान में किराएदार के कब्जा जमाए रखने से संबंधित था। पुलिस पंचायत ने दोनों पक्षों को बुलाया और समझाइश के बाद किराएदार ने 15 दिसंबर तक स्वेच्छा से मकान खाली करने का निर्णय लिया। तीसरा केस सबसे संवेदनशील तीसरा मामला एक बुजुर्ग दंपती का था, जिन्हें उनके बेटे-बहू ने मारपीट कर घर से निकाल दिया था। वे खेत पर झोपड़ी डालकर रहने को मजबूर थे और न्याय न मिलने की आशंका में जहर खाकर आत्महत्या करने तक की बात कह चुके थे। मंगलवार को वे जहर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के आश्वासन के बाद, पंचायत में बेटे-बहू और दंपती को बुलाया गया। सुनवाई में स्पष्ट किया गया कि मकान पर वैधानिक अधिकार बुजुर्ग दंपती का है। पंचायत की समझाइश के बाद बेटे-बहू ने अपनी गलती स्वीकार की। बहू ने सास के पैर छूकर क्षमा मांगी और उन्हें सम्मानपूर्वक साथ रखने का वचन दिया। पंचायत सदस्यों ने बुजुर्ग दंपती को मिठाई खिलाकर उनका सम्मान किया, जिससे उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। बैठक में आए कुछ अन्य प्रकरणों की अगली सुनवाई की तिथियां भी निर्धारित की गईं। विदिशा पुलिस की यह अनोखी पहल वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे ने की। कोर कमेटी के सदस्य डॉ. सचिन गर्ग, आर. कुलश्रेष्ठ, दिनेश वाजपेयी, अतुल शाह, अजय टंडन और बिनोद शाह की उपस्थिति में सभी मामलों का समाधान मानवता और संवेदनशीलता के साथ किया गया।


