राज्य के 325 आदर्श विद्यालयों की स्थलीय जांच शुरू हो चुकी है। इनमें से कुछ स्कूलों को मिला आदर्श विद्यालय का तमगा छिनेगा। जो अर्हता नहीं रखते, वे छंटेंगे। ऐसे नए स्कूल, जो इस श्रेणी में आने योग्य हैं, उन्हें शामिल किया जाएगा। हालांकि, अभी इसकी संख्या 325 से अधिक नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने राज्य के 325 हाई स्कूलों को अपग्रेड कर आदर्श विद्यालय बनाया था। प्रदेश के 89 मॉडल स्कूलों में से 18 मॉडल स्कूल, 49 शहरी निकायों के 62 स्कूल, 245 प्रखंडों में से 1-1 स्कूलों को आदर्श विद्यालय बनाया गया था। आदर्श विद्यालयों में छात्रों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। बच्चों के नामांकन के अनुसार वर्ग कक्ष के अलावा स्कूल की भौतिक संरचना सुदृढ़ होनी चाहिए। विकसित खेल मैदान, चाहरदीवारी, स्वच्छ पेयजल, बालिका-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पुस्तकालय, स्कूल में स्वच्छता और इंटरनेट युक्त कंप्यूटर लैब का होना बहुत ही जरूरी है। इसके अलावा सभी विषयों के शिक्षक होने चाहिए। 40 बच्चों पर एक शिक्षक की संख्या होनी चाहिए। शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने बताया है कि आदर्श स्कूलों के लिए मानदंड तय हैं। ऐसे में इन स्कूलों की स्थलीय जांच कराई जा रही है। फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद जितने स्कूलों के नाम छंटेंगे, उनकी जगह पर वैसे स्कूलों को, जो अर्हता रखते हैं, को शामिल किया जाएगा।


