आदिवासियों की जल, जंगल व जमीन पर कब्जा करवा रही सरकार: जरिता

भास्कर न्यूज | अंबिकापुर बॉक्साइट खनन को लेकर सरगुजा संभाग में जारी विवाद के बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव जरिता लैतफलांग ने गुरुवार को मैनपाट पहुंचकर प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की। हाल ही में पर्यावरण स्वीकृति के लिए बिना किसी पूर्व सूचना के आयोजित जनसुनवाई में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उत्तरी छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों में बढ़ते टकराव ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, जिसके चलते कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है। लैतफलांग हाल के दिनों में लगातार खनन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। रायगढ़ के तमनार और परसोढ़ी कला में ग्रामीणों से मुलाकात के बाद अब मैनपाट पहुंचकर उन्होंने प्रभावित परिवारों से चर्चा की। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग सभी स्थानों पर स्थिति समान है। स्थानीय निवासियों की इच्छा और स्वीकृति के विपरीत खनन कंपनियों के मुनाफे के लिए सरकार प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने आदिवासियों की जमीन, पानी और वन संसाधनों पर कब्जा करवा रही है। उन्होंने कहा सरगुजा में पांचवीं अनुसूची लागू है, ताकि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का अधिकार सुरक्षित रहे, लेकिन आज यह अधिकार खतरे में हैं। छात्र फूलचंद बोला- लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का हिड़मा बनूंगा 30 दिसंबर की जनसुनवाई में ऐसी ही वजहों से लोग हिड़मा बनते हैं कहकर सुर्खियों में आए युवक फूलचंद मांझी भी सभा में मौजूद थे। बीएससी द्वितीय वर्ष का यह छात्र आज भी उसी पीड़ा को दोहराते हुए बोला कि उसका आशय हथियार उठाने से नहीं है, बल्कि वह अपने समाज के अधिकारों की लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ना चाहता है। उसने बताया कि खनन से न तो रोजगार मिल रहा है और न ही सुरक्षा। खदानों को खुला छोड़ देने से मवेशियों और ग्रामीणों की मौत तक हो रही है। उसने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रखेगा।

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