रामगढ़| आदिवासी छात्र संघ की रामगढ़ जिला व नगर कमेटी की बैठक हुई। रविवार को बाजारटांड के सिदो कान्हो स्टेडियम में संघ के जिलाध्यक्ष सुनील मुंडा की अध्यक्षीय और नगर प्रभारी प्रमोद मुंडा के संचालन में बैठक के दौरान कुर्मी कुडर्मी की आदिवसी में शामिल करने की मांग का विरोध किया गया। इसमें, आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि कुर्मी कुडर्मी द्वारा पहले भी आदिवासी में शामिल होने के सवाल पर आंदोलन किया था। आदिवासी छात्र संघ हमेशा से इसका विरोध करता रहा है। तर्क दिया जाता है कि 1950 के पहले कुर्मी कुडर्मी आदिवासी सूची में शामिल थे। जिसे हटा दिया गया है। जबकि, आदिवासियों का कहना है कि 1871 से लेकर 1941 के जनगणना में कुर्मी कुडर्मी का आदिवासी कॉलम में नाम अंकित नहीं है। 1913 में आदिवासी सूची में आदिवासी में थे। ऐसा कुर्मी कुडर्मी दावा पेश करते है। 2 मई 1913 के ऑर्डर संख्या 550 के संबंध इंडियन सकसेशन एक्ट 1865 से है, न की आदिवासी चिन्हित करने का 1950 के पहले, यदि कुर्मी आदिवासी में शामिल थे। जब इन्हें आदिवासी सूची से एक षड्यंत्र के तहत हटा दिया गया। तब इन लोगों का आंदोलन धरना, रेल रोको, सड़क जाम आदि संघर्ष करने का कोई भी लिखित कार्यक्रम दिखाई नहीं देता है। भारत सरकार आदिवासी में शामिल होने का संवैधानिक क्राइटेरिया है। इसमें किसी भी तरह से यह अपने आप को स्थापित नहीं कर पाते है, और इसे भारत सरकार ने खारिज कर दिया। कोलकाता हाईकोर्ट में भी आदिवासी में शामिल होने की याचिका खारिज कर दिया है। अब सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से यह आदिवासी बनने का दबाव डाल रहे है, जो उचित नहीं है।


