आदिवासी नगर निगम कर्मी को जाना था इलाज कराने, छुट्टी नहीं मिलने से हुई मौत, दाह-संस्कार के पैसे तक नहीं दिए

रांची नगर निगम में गुरुवार को भी काम-काज ठप रहेगा। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के साथ घरों का असेस्मेंट, बाजार शाखा की संपत्ति से मासूल वसूली, सड़क-नाली की योजना बनाने सहित सभी कार्य नहीं होंगे। क्योंकि, नगर निगम के 300 से अधिक स्थाई कर्मचारी हड़ताल पर अड़ गए हैं। निगमकर्मियों ने निगम के दोषी पदाधिकारी पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर निगमकर्मियों ने मुख्यमंत्री को मार्मिक पत्र लिखकर शोषण करने वाले पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि नगर निगम के टैक्स कलेक्टर नकुल तिर्की को इलाज के लिए अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया। 21 दिन तक फाइल घूमती रही आैर जिस दिन उसकी मौत हो गई उस दिन स्थापना शाखा प्रभारी द्वारा अवकाश स्वीकृत किया गया। निगम में लंबे समय से परंपरा चली आ रही है कि किसी भी निगमकर्मी की मौत होती है तो पीड़ित परिवार को एक शोक पत्र आैर अंतिम संस्कार के लिए पांच-दस हजार रुपए सहायता राशि दी जाती है। लेकिन नकुल तिर्की की मौत होने पर निगम के पदाधिकारियों ने प्रशासक को भी गुमराह कर दिया आैर एक आदिवासी कर्मचारी के दाह संस्कार के लिए पैसे तक नहीं दिए गए। संघ ने निगम में फैले भ्रष्टाचार की जांच कराने की भी मांग की है। अनुकंपा पर आश्रितों की नियुक्ति नहीं करके बाहरी लोगों को संविदा पर नियुक्त करने, पेंशन में कटौती करने, प्रोन्नति सहित अन्य मामलों की जांच कराने की मांग की गई है। इंजीनियर-इंफोर्समेंट कर्मचारी की नियुक्ति की जांच की मांग निगमकर्मियों ने पत्र में कहा है कि निगम से हटाए गए छह जूनियर इंजीनियरों को दुबारा बहाल किया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व प्रशासक द्वारा हटाए गए इंफोर्समेंट कर्मचारियों को भी चुपके-चुपके दुबारा बहाल किया गया । इसके लिए किसी तरह का विज्ञापन तक नहीं निकाला गया। लंबे समय से कई पदाधिकारी एक ही जगह जमे हैं तो कुछ बार-बार यहीं पोस्टिंग कराते हैं, इसकी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।

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