राजधानी से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित जिले के सबसे बड़े आदिवासी गांव केकड़िया की बेटियों का डॉक्टर और वैज्ञानिक बनने का सपना अब अधूरा नहीं रहेगा। गांव की शासकीय माध्यमिक शाला को हाईस्कूल में अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में राजभवन ने स्कूल शिक्षा विभाग को आवश्यक निर्देश दिए हैं। वहीं, शनिवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल स्वयं ग्राम केकड़िया पहुंचे और मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए गए शैक्षणिक मॉडलों को देखा और उनकी पढ़ाई की जानकारी ली। राज्यपाल के अपर सचिव द्वारा जारी पत्र में दैनिक भास्कर में 20 दिसंबर को प्रकाशित समाचार “राजधानी सिर्फ 20 किलोमीटर दूर, पर पढ़ाई का सफर कोसों दूर, 8वीं के बाद नहीं पढ़ पाती हैं आदिवासी बेटियां”का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। इसके बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया शुरू की जिला शिक्षा अधिकारी (भोपाल) ने 1 जनवरी 2026 को विकासखंड स्रोत केंद्र समन्वयक (फंदा ग्रामीण) को आदेश जारी कर ग्राम केकड़िया स्थित शासकीय माध्यमिक शाला को हाईस्कूल में उन्नयन के लिए परीक्षण प्रतिवेदन मांगा। यह ईमेल और हार्डकॉपी दोनों माध्यमों से भेजा गया, जिसे आगे स्कूल शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया है। अंतिम निर्णय अब विभाग स्तर पर लिया जाना है। राजभवन के पत्र में उल्लेख किया गया है कि पिछले पांच वर्षों में माध्यमिक शिक्षा के बाद लगभग 69 जनजातीय छात्राओं ने पढ़ाई छोड़ दी। कारण यह है कि निकटतम हाईस्कूल 7 से 8 किलोमीटर दूर है और वहां तक पहुंचने का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है, जहां सार्वजनिक परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। केकड़िया में हाईस्कूल खुलने से रसूलिया, भानपुर, खाकरडोल, अमरपुरा, समसपुरा, सरौतीपुरा और बावड़ीखेड़ा सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने बताया, “हमने स्कूल से जुड़ी पूरी रिपोर्ट और आवश्यक जानकारी विभाग को भेज दी है। आगे का निर्णय स्कूल शिक्षा विभाग स्तर पर लिया जाना है।”


