आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीजीपी को कोर्ट में हाजिर होकर गैर-अनुपालन का कारण बताना पड़ सकता है

रांची झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को एक एलपीए पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रार्थी कर्मी की नियुक्ति 20 जनवरी 2026 तक सुनिश्चित करें। दरअसल, हाईकोर्ट ने प्रार्थी सैमुअल डुंगडुंग को 8 फरवरी 2023 को बिना बकाया वेतन के बहाल करने का निर्देश दिया गया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने अदालत में एलपीए दाखिल की थी। करीब तीन साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने बहाली का आदेश लागू नहीं किया। साथ ही अपीलीय अदालत से इस आदेश पर कोई स्टे भी नहीं लिया था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि 20 जनवरी 2026 तक सैमुअल डुंगडुंग को बहाल किया जाए। 21 जनवरी 2026 को अदालत में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो झारखंड के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर गैर-अनुपालन का कारण बताना पड़ सकता है। झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को दी जाने वाली सुविधाओं से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सुविधाओं को लेकर बनाए जा रहे नियम के स्टेटस की जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने यह निर्देश सेवानिवृत्त जस्टिस अमरेश्वर सहाय की याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि झारखंड में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े नियम अंतिम चरण में हैं। इस संबंध में फाइल मुख्यमंत्री के पास लंबित है। मुख्यमंत्री के राज्य से बाहर होने के कारण विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अदालत ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई फरवरी के प्रथम सप्ताह में निर्धारित की और तब तक नियमों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सूत्रों के अनुसार, झारखंड में बनाए जा रहे नियम आंध्र प्रदेश मॉडल के अनुरूप हैं, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों के लिए सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में पेंशन, चिकित्सा सुविधा और अन्य भत्ते शामिल हैं। इस फैसले से राज्य में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सुविधाओं के नियम स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है। झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को साहिबगंज में पाइपलाईन से जलापूर्ति की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद साहिबगंज जिला विधिक प्राधिकार के सचिव को निर्देश दिया कि कार्यपालक अभियंता और प्रार्थी के साथ घरों में जाकर जलापूर्ति का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करें। मामले में अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि साहिबगंज में पेयजल आपूर्ति का कार्य प्रगति पर है। कनेक्शन के लिए आवेदन देने वाले 8,700 लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करा दिया गया है। राज्य सरकार के इस जवाब पर अदालत ने स्थल निरीक्षण के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने साहिबगंज जलापूर्ति योजना को पूरा करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगी थी।

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