कैरव का 4 दिन बाद भी सुराग नहीं, 22 मिनट के रहस्य में उलझी पुलिस

उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है। जांच की सबसे अहम कड़ी बने 22 मिनट के गैप को सुलझाने में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं, जिसे इस पूरे अपहरण कांड का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, कैरव गांधी का अपहरण पुलिस का स्टीकर लगी स्कॉर्पियो से किया गया। यह स्कॉर्पियो 13 जनवरी को दोपहर 1.29 बजे पाटा टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। इसके बाद यही वाहन करीब 22 मिनट बाद, पाटा टोल से लगभग दो किमी दूर जोयदा स्थित एक होटल के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देता है। सबसे अहम बात यह है कि होटल के कैमरे में दिखी स्कॉर्पियो पर पुलिस का स्टीकर नहीं था। महज दो किमी तय करने में 22 मिनट लगने को लेकर पुलिस को गंभीर संदेह है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन 22 मिनटों के दौरान अपहरणकर्ताओं ने वाहन कहीं रोककर स्कॉर्पियो से पुलिस का स्टीकर हटाया। कैरव गांधी को दूसरी गाड़ी में बैठाया, फिर उन्हें रांची की ओर भेज दिया। बिना स्टीकर वाली स्कॉर्पियो भी उसी दिशा में निकल गई। इसी कड़ी को जोड़ने के लिए पुलिस ने होटल समेत एनएच-33 पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। जेम्को के तीन युवक से पूछताछ, साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस ने छोड़ा अपराधियों को तलाश रही पुलिस टीम की नजर भागलपुर के कुख्यात छोटू यादव गिरोह पर भी बनी हुई है। यह गिरोह अपहरण, फिरौती, रंगदारी और संगठित अपराध जैसे मामलों में पहले भी संलिप्त रहा है। छोटू यादव गिरोह खासतौर पर व्यापारियों और ठेकेदारों को निशाना बनाता रहा है। इसकी गतिविधियां भागलपुर, नवगछिया, कहलगांव, सुल्तानगंज से लेकर मुंगेर और खगड़िया बेल्ट तक फैली रही हैं। पुलिस गैंग के गुर्गों की तलाश में है। कारोबारी पुत्र के अपहरण मामले में संदेह के आधार पर पुलिस ने जेम्को निवासी खट्टा बबलू और दो अन्य युवकों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद पुलिस को इनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद तीनों को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। अपहरण मामले में पुलिस की जांच का फोकस अब बिहार के हाजीपुर गैंग पर है। शुक्रवार को झारखंड पुलिस की विशेष टीमों ने हाजीपुर, पटना और आसपास के इलाकों में कई ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस को आशंका है कि इस कांड में हाजीपुर के कुख्यात अरविंद गिरोह की भूमिका हो सकती है। बताया जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। हालांकि, लगातार दबिश के बावजूद अब तक पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

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