आधार बनाने में फर्जीवाड़ा, बच्चों के बन रहे 2-2 कार्ड

स्कूलों में एडमिशन और आधार कार्ड के रिकॉर्ड में अलग-अलग जानकारी झारखंड में आधार कार्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। यहां बच्चों के दो-दो आधार बन रहे हैं। राज्य के करीब चार लाख बच्चों के स्कूलों में एडमिशन और आधार के तथ्यों में भारी अंतर मिल रहा है। नाम के साथ जन्म तिथि भी बदल रही है। अपार कार्ड बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने जब यू-डायस प्लस और आधार कार्ड को मैच कराना शुरू किया तो यह फर्जीवाड़ा सामने आया। दरअसल एडमिशन के समय स्कूलों के यू-डायस प्लस में बच्चों का नाम, जन्म तिथि, पता, माता-पिता का नाम आदि दर्ज होता है। यही जानकारी आधार कार्ड में भी होता है। लेकिन कई अभिभावकों ने आधार में अपने बच्चों की जानकारी बदल दी है। इसी बीच जब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी बच्चों का अपार कार्ड बनाने का निर्देश दिया तो वेलिडेशन (पुष्टि) न होने के कारण अपार कार्ड बन ही नहीं रहा है। शेष पेज 13 पर शिक्षा विभाग के ऑफिस की जगह दुकानों पर बन रहा आधार राज्य में सरकारी स्कूलों में बच्चों का आधार कार्ड बनाने में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि शिक्षा विभाग के ऑफिस (बीआरसी भवन) में आधार ऑपरेटर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते हैं। वे बीआरसी भवन की जगह दुकानों में आधार इनरॉलमेंट किट का उपयोग कर आधार बना रहे हैं और अपडेट कर रहे हैं। आधार इनरॉलमेंट किट शिक्षा विभाग की संपत्ति है। इसलिए इसका उपयोग बीआरसी भवन में होना चाहिए। अच्छे स्कूल में एडमिशन के लालच में भी हो रहा हेरफेर पांचवीं कक्षा के बाद जब अच्छे स्कूल में एडमिशन नहीं हो पाता है तो अभिभावक अपने बच्चों के नाम, जन्मतिथि आदि बदलकर नया आधार कार्ड बनवा कर दूसरे स्कूल में एडमिशन करा लेते हैं। ऐसे में आधार का डेटा तो बदल जाता है, पर यू-डायस प्लस में डेटा वही रह जाता है। इससे वेलिडेशन फेल हो जाता है। सुविधाएं सरकारी स्कूल से, शिक्षा निजी स्कूल में ले रहे कई अभिभावकों ने सरकारी सुविधाएं लेने के लिए अपने बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूल में करा रखा है। फिर नाम में थोड़ा हेरफेर कर निजी स्कूलों में भी नामांकन करा दिया है, ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। ऐसे बच्चे सरकारी स्कूलों से छात्रवृत्ति, साइकिल और यूनिफॉर्म आदि लेते हैं और निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। इधर, राज्य परियोजना निदेशक ने लिखा क्या है यू-डायस प्लस… यू-डायस प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) एक पोर्टल है। इस पर 12वीं तक के सभी स्कूलों का ब्यौरा है। जो स्कूल इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उनके लिए एक यू-डायस नंबर भी जारी किया गया है। नामांकन के समय छात्रों की पूरी जानकारी यहां पर दर्ज की जाती हैं। क्या है अपार आईडी… अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्टरी) 12 अंकों वाला एक विशिष्ट पहचान पत्र है, जिसे भारत सरकार ने छात्रों की शैक्षणिक जानकारी को एक डिजिटल प्लेटफार्म पर संग्रहित करने के लिए शुरू किया है। यह आईडी शैक्षणिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखता है। दो-दो आधार बनाने की ये है बड़ी वजह

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