आरयू में खुलेगा हीरा तराशने का प्रशिक्षण केंद्र

आईआईटी मद्रास और आईआईटी धनबाद करेगा इसमें सहयोग रांची यूनिवर्सिटी में हीरा तराशने का प्रशिक्षण केंद्र बनेगा। इसमें देश के सबसे अग्रणी तकनीकी संस्थान आईआईटी मद्रास व आईआईटी धनबाद सहयोग करेगा। इसके लिए आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी कमाकोटी जल्दी ही रांची आएंगे। उनके रांची प्रवास के दौरान हीरा कटिंग ट्रेनिंग सेंटर और इनोवेशन सेंटर सहित कई प्रोजेक्ट पर मुहर लग जाएगी। आरयू के वरीय शिक्षकों का कहना है कि इस प्रशिक्षण केंद्र में हीरा कटिंग, पॉलिशिंग, इसमें उपयोग होने वाले केमिकल-उपकरण और सुरक्षा समेत सभी पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां से प्रशिक्षण लेकर लोग हीरा कटिंग और पॉलिशिंग की कला में महारत हासिल कर इस क्षेत्र में करिअर बना सकते हैं। क्योंकि झारखंड में हीरा कटिंग उद्योग की संभावनाएं हैं, लेकिन इसे विकसित करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर नहीं है। इस सेंटर के खुलने से प्रशिक्षित लोगों को हीरा कटिंग सेंटर में रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसस उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इस क्षेत्र में महिलाएं भी बेहतर योगदान दे सकती हैं। इसके अलावा आरयू में इनोवेशन सेंटर स्थ​ापित करने की भी योजना है। इसके लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। मल्टीपर्पस एक्जामिनेशन सेंटर (एमपीईएच) के सामने स्थित खाली भवन में इनोवेशन सेंटर स्थापित करने पर सहमति बन गई है। गौरतलब है कि इस भवन में आउटसोर्सिंग परीक्षा एजेंसी का सेंटर था, जो अब शहीद चौक स्थित मुख्यालय में शिफ्ट हो गया है। यहां रिसर्च के लिए सीसीएल की ओर से पांच करोड़ रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे। रांची यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. अ​जीत कुमार सिन्हा ने कहा कि यहां हीरा तराशने के प्रशिक्षण केंद्र के साथ ही ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए रिसर्च और इनोवेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसे आईआईटी मद्रास और आईआईटी धनबाद के सहयोग से संचालित किया जाएगा। फायर कंट्रोल के लिए ड्रोन तकनीक पर भी होगा रिसर्च रांची यूनिवर्सिटी, आईआईटी मद्रास और आईआईटी धनबाद की टीमें फायर कंट्रोल के लिए ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए रिसर्च करेगी। इसका उद्देश्य फायर कंट्रोल के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग के तरीकों का अनुसंधान करना है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से आग को नियंत्रित करने के नए तरीके ढूंढ़े जाएंगे। आग के स्रोत का पता लगाने, आग की तीव्रता मापने और आग बुझाने के तरीकों पर शोध होगा। आग पर नियंत्रण के और अधिक प्रभावी तरीके विकसित किए जाएंगे। ड्रोन तकनीक के माध्यम से तंग गलियों और जंगलों में फायर ब्रिगेड आसानी से पहुंच सकेगा। इस दिशा में शोध के लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है।

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