प्रदेश के 100 प्रगतिशील व नवाचारी किसानों को सरकार खेती में आधुनिक तकनीक व नवाचारों से रूबरू करवाने के लिए जल्द ही विदेश यात्रा पर ले जाएगी। अब तक किसानों को इजरायल भेजा जाता रहा है लेकिन इजरायल–हमास के बीच हाल ही में युद्ध विराम हुआ है। वहां के हालात देखते हुए इस बार किसानों को नीदरलैंड और डेनमार्क ले जाया जाएगा। वहां इन किसानों को हाईटेक खेती व डेयरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक सप्ताह के इस भ्रमण कार्यक्रम को लेकर किसानों का चयन हो चुका है। जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर, कोटा सहित सभी संभाग क्षेत्र के किसानों को मौका दिया जाएगा। हालांकि चयन के लिए भी मापदंड निर्धारित किए गए थे। 75 फीसदी किसानों का चयन विभागीय स्तर पर हुआ है और 25 प्रतिशत सरकार अपने स्तर पर करेगी। बृजलाल मीणा: बारिश का पानी सहेज अमरूद, नींबू, अनार उगाए गंगापुर सिटी के पिलौदा गांव निवासी बृजलाल मीणा 2013 से व्यवस्थित रूप से बागवानी कर रहे हैं। इसके लिए अपनी ऊबड़ खाबड़ जमीन को समतल करवाकर दो तालाब बनवाए। उस वक्त जमीन पर बबूल के पेड़ भी नहीं लगते थे। तब परिवार के अन्य लोगों ने रिश्तेदारों से कहा कि इसे समझाओ, यह फालतू में पैसा बर्बाद कर रहा है लेकिन धुन के पक्के मीणा ने ऐसी बातों पर ध्यान नहीं दिया और आज समूचे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गए हैं। प्रगतिशील किसान के रूप में उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। उनके यहां के फल दिल्ली और बरेली की मंडी में जा रहे हैं। फलों के साथ वे सब्जियां, गेहूं, चने, सरसों व मूंग की भी खेती कर रहे हैं। 7 बीघा में बागवानी से लाखों रुपए कमा रहे हैं। रावलचंद्र नौसर: 10वीं पास, लेकिन शकरकंद की 3 किस्में इजाद की फलोदी जिले के नौसर निवासी रावलचंद्र पिछले 12 वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। दसवीं तक पढ़े हैं लेकिन कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क और किसान मेलों में सीखकर शकरकंद की तीन नई किस्में विकसित कर दी। 110 बीघा एरिया में जीरा, गेहूं, चना, मैथी, बाजरा, मूंग सहित अन्य कई फसलें ले रहे हैं। जैविक खेती करने के लिए इन्हें धरती पुत्र अवार्ड और जिला स्तर पर भी कई पुरस्कार मिले हैं। फसलों में कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करते। रोग नियंत्रण के लिए गोमूत्र व नीम पत्तों के घोल काे काम में ले रहे हैं। खाद के रूप में गोबर डाल रहे हैं।


