भास्कर न्यूज | अमृतसर चिन्मय अमृत आश्रम रणजीत एवेन्यू में “श्रीमद्भगवद्गीता का आश्वासन” विषय पर 2 दिवसीय मोटिवेशनल स्पीच का आयोजन हुआ। पूज्य आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज (मुख्य उपदेशक, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार) ने बताया कि आध्यात्मिकता में श्रीमदभगवद्गीता सबसे महान ग्रंथ है क्योंकि यह हमारे जीवन में उद्देश्यों और मार्ग का निर्धारण करता है और हमें मुश्किलों का सामना कैसे करना है, यह बताता है। एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें शिष्य और गुरु संवाद को दर्शाया गया है, इसमें श्रीकृष्ण के 2 स्वरूपों को हम देख सकते हैं एक जो वे जीव रूप में हैं और दूसरे जो भगवान रूप में हैं। उन्होंने कहा इन दोनों स्वरूपों के द्वारा भगवान श्री कृष्ण हमें बताना चाहते हैं कि हम सबके अंदर परमात्मा स्वयं विद्यमान हैं यदि हम साधना के द्वारा यह सीख लें कि किस प्रकार बिना निराश, हताश, दुःखी हुए जीवन निर्लिप्त भाव से जीते हुए, कर्म में बिना आसक्त होते हुए, हम भी अपना आरोहण कर भगवान की स्थिति को पा सकते हैं। हम किसी खदान के हीरे के समान हैं जो तराशे हुए हीरे के समान बहुमूल्य हो सकते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता हमें संदेश देती है कि जो भगवान में अपना मन पूर्ण रूप से लगा देते हैं वह दोषपूर्ण होते हुए भी भगवान को अतिप्रिय हो जाते हैं क्योंकि उनका समर्पण उन्हें दोषों से मुक्त कर देता है। इसलिए हमें भी दोष मुक्त होकर भगवान की शरण में बिना किसी संशय के जाना चाहिए। कार्यक्रम के आरंभ में चिन्मय मिशन के अध्यक्ष अविनाश महेंद्र जी ने आचार्य जी का स्वागत किया। अविनाश महेंद्र ने कहा कि गीता जी को पढ़ने-सुनने समझने से पहले हमें अर्जुन बनना होगा। श्रीमदभगवद्गीता परायण होकर निरंतर मनन, चिंतन करते हुए हृदय में गीता जी के प्रति भाव बनाकर चलना होगा, उनके आदर्शों को जीवन में धारण करके गीता मयी बनते हुए आगे बढ़ने पर हमें शांति प्राप्त होगी।


