आपदा को चुनौती मानकर आगे बढ़ें राष्ट्रहित को रखें सर्वोपरि: ब्रह्मर्षि विशाल

भास्कर न्यूज | लुधियाना चंडीगढ़ रोड स्थित अंबर गार्डन में मल्टीवर्स सोल्स की तरफ से आयोजित सात दिवसीय 360 डिग्री ट्रांसफॉर्मेशन कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। इस दौरान ब्रह्मर्षि विशाल ने साधकों में ऊर्जा भरते हुए कहा कि महानता का मार्ग हमेशा विपरीत परिस्थितियों से होकर गुजरता है। उन्होंने आह्वान किया कि व्यक्ति को आपदाओं में हौसला हारने के बजाय उन्हें एक अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए। ब्रह्मर्षि विशाल ने पारिवारिक मोह और वैश्विक प्रेम के बीच का सूक्ष्म अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि मोह स्वार्थ का प्रतीक है। जबकि प्रेम समर्पण और मुक्ति का मार्ग है। यदि हमारे क्रांतिकारी और सैनिक केवल निजी स्वार्थ के बारे में सोचते तो राष्ट्र सुरक्षित न होता। उन्होंने साधकों को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी। सात्विक जीवन और कर्मों का सिद्धांत कार्यशाला में साधकों ने व्यसन मुक्ति और सात्विक जीवन शैली अपनाने का संकल्प लिया। गृहणियों को विशेष रूप से प्रसन्न मन से भोजन बनाने की सलाह दी गई। क्योंकि बनाने वाले के भाव ही ऊर्जा का संचार करते हैं। कर्मों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पाप का पश्चाताप तो संभव है, लेकिन उसका फल भोगना ही पड़ता है। समापन अवसर पर साधकों को 3-6-9 विधि और भस्त्रिका प्राणायाम के साथ संगीत के माध्यम से मानसिक शांति का अभ्यास कराया गया। आयोजकों ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मकता फैलाना और जीवन ऊर्जा टैक्स के माध्यम से वंचित वर्ग की सेवा करना है।

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