जिनके रक्त से लाइलाज बीमारी थैलेसिमिया पीड़ित बच्चों की सांसें चल रही हैं। चल फिर सक रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई और अपनी दिनचर्या कर रहे हैं, आज उन्हीं बच्चों ने ऐसे रक्तदाताओं को सम्मानित किया। ऐसे बच्चों ने रक्तदाताओं को सम्मानित करते हुए कहा- थैंक यू अंकल। बच्चों ने कहा, आप ही हमारी लाइफलाइन, आप जैसे रक्त वीरों के खून से ही चलती हैं हमारी सांसें। संस्था ‘लहू बोलेगा’ ने इन बच्चों को ऐसा करने का मंच प्रदान किया। रविवार को सत्यभारती सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से अपने माता-पिता एवं परिजनों के साथ पहुंचे। जहां बच्चों ने 27 व 24 बार रक्तदान किए साजिद उमर और हर्षवर्धन को मेडल पहना कर और फूल देकर सम्मानित किया। रक्तदाता संस्था लहू बोलेगा ने थैलेसिमिया पीड़ित बच्चों को दिया प्लेटफॉर्म, जहां बच्चों ने 27 व 24 बार रक्तदान करने वाले ब्लड हीरोज का जताया आभार क्या कहते हैं डोनर : डोनर साजिद उमर और हर्षवर्धन बताते हैं- उन्हें खुशी है कि उनके दिए गए रक्त से किसी की जिंदगी बचती है। वे आगे भी यह कार्य करते रहेंगे। जितना संभव हो सकेगा, खून दान करेंगे और दूसरे लोगों से भी कराएंगे। पटेल नगर से 14 वर्षीय पीड़ित अभय कुमार के साथ मौसी इंदू सिन्हा पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे खुद एक नर्स हैं, इसलिए व्यवस्था कर लेती हैं। मगर हर मरीज को खून फ्री में आसानी से मिले, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। गोला चितरपुर निवासी पिंकी देवी अपनी 17 वर्षीय बच्ची शीतल कुमारी को लेकर पहुंचीं। बताया कि उन्हें ब्लड डोनर ढूंढ कर खून जुटाना पड़ता है। ओरमांझी निवासी मनीष कुमार अपने दो वर्षीय पीड़ित बच्चे हर्ष प्रतीक को लेकर पहुंचे। बताया कि उनके बच्चे को छह महीने से यह बीमारी है। महीने में दो से तीन बार खून चढ़ाना पड़ता है। सरकार को डोनर कार्ड उपलब्ध कराते हुए फ्री में खून की व्यवस्था करनी चाहिए।


