रांची रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने सड़क को ही पार्किंग स्टैंड बना दिया है। सड़क किनारे दोनों ओर ऑटो और ई-रिक्शा खड़ी कर चालक सवारी का इंतजार करते हैं। ऐसे में वहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। नो पार्किंग में खड़े होने वाले ऑटो और ई-रिक्शा चालक को हटाने के लिए ट्रैफिक जवानों की भी तैनाती नहीं की गई है। चुटिया ट्रैफिक थानेदार भी वहां से जाम हटाने के लिए कभी सक्रिय नहीं दिखे। यही वजह है कि चंद कदम की दूरी पर ही ट्रैफिक थाना होने के बावजूद वहां नो पार्किंग जोन में ऑटो व ई-रिक्शा खड़े रहते हैं। सड़क जाम रहने की वजह से निजी गाड़ियों से सफर करने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नो पार्किंग जोन में सड़क किनारे ऑॅटो व ई-रिक्शा खड़ा करने वालों के खिलाफ पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाई थी पुलिस, फिर से सज गए दुकान स्टेशन रोड में वाहन सवार को जाम से निजात दिलाने के लिए कुछ दिनों पहले ही नगर निगम के साथ मिलकर ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया था। सड़क किनारे अतिक्रमण कर लगाए गए बांस-बल्ली को तोड़ा गया था। हालांकि कुछ दिनों बाद फिर से सड़क किनारे दुकानें सज गईं। पुलिस के कई पदाधिकारी प्रतिदिन वहां से आना-जाना करते हैं लेकिन अतिक्रमण कर दुकान लगाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। रेलवे और पुलिस मिल कर निकाले समाधान रांची रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर ऑटो और ई-रिक्शा का जमावड़ा। हर रोज लोग जाम में फंस रहे, यात्रियों की छूट जा रहीं ट्रेनें। स्टेशन के लिए 200 ऑॅटो का है परमिट, प्रतिदिन चल रहीं 600 गाड़ियां स्टेशन रोड में चलने वाले मात्र 200 ऑॅटो को ही परमिट दिया गया है। हालांकि इस रूट में प्रतिदिन लगभग 400 ऑटो का परिचालन हो रहा है। इसके अलावा लगभग 200 की संख्या में ई-रिक्शा का भी परिचालन हो रहा है। हालांकि एक भी ई-रिक्शा को रेलवे स्टेशन के लिए परमिट नहीं दिया गया है। प्रतिदिन 600 से ज्यादा ऑटो और ई-रिक्शा का रांची रेलवे स्टेशन तक परिचालन हो रहा है। रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले ऑटो के लिए जो पार्किंग बनाया गया है, वहां लगभग 100 गाड़ी लगने का ही क्षमता है। जगह के अभाव में बाकी ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर सवारी बैठाते हैं।


