आम आदमी परेशान:नगर निगम को 4 कॉलोनियां हैंडओवर करने आरडीए ने लिखे 10 पत्र, अब तक फैसला नही‍ं

रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित कमल विहार, इंद्रप्रस्थ, बोरिया खुर्द और हीरापुर सरोना के रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, सफाई, पानी-बिजली के मेंटेनेंस की सुविधा नहीं मिल रही है। यहां डोर टू-डोर कचरा कलेक्शन नहीं होता है। लोग खाली प्लाट में कचरा फेंकने को मजबूर हैं। इसी तरह इन कॉलोनियों में बिजली की भी समस्या है। यहां अक्सर स्ट्रीट लाइट बंद रहती है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। यही वजह है कि आरडीए इन कॉलोनियों को हैंड ओवर करने के लिए पिछले तीन साल से कवायद कर रहा है। आरडीए के अफसरों ने इस संबंध में करीब 10 पत्र निगम को लिखा। दो साल पहले निगम के अफसरों ने इन कॉलोनियों का सर्वे कर हैंड ओवर लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। लेकिन अचानक मामला ठंडे बस्ते में चला गया। यही कारण है कि आरडीए की कॉलोनियों में हालात नहीं सुधर रहे। आरडीए को नहीं मिलता मरम्मत का फंड : आरडीए के अफसरों का कहना है कि आरडीए द्वारा बसाई गई कॉलोनियों में पानी, बिजली, सड़क, सफाई और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का जिम्मा आरडीए संभाल रहा है। लेकिन आरडीए के पास मरम्मत का फंड नहीं होता है। यही कारण है कि कॉलोनियों में रोजाना सफाई नहीं हो पाती। कमल विहार
दोपहर 1.10 बजे नाले की सफाई नहीं होती
दैनिक भास्कर की टीम कमल विहार सेक्टर 1 पहुंची तो यहां पर चेंबर चोक था। नाली बजबजा रही थी। चेंबर का पानी सड़क पर आ रहा था। थोड़ी दूर पर कुछ लोग चेंबर साफ करवा रहे थे। क्योंकि वहां निगम और आरडीए साफ करवाने नहीं जाता। वहां मौजूद युवक आशीष देवांगन ने बताया कि चेंबर चोक होने पर अपने पैसे से साफ करवाना पड़ता है। यहां डोर-टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाडिय़ां नहीं आती। ठेकेदार मकान बना रहे हैं और मलबा चेंबर और खाली प्लाट में डाल रहे हैं। इससे नाली जाम हो जाती है। थोड़ी दूर जाने पर यहां रहने वाली प्राची दीक्षित ने बताया कि शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। सिर्फ कुछ जगहों की ही स्ट्रीट लाइट लाइट जलती है। पुलिस की पेट्रोलिंग भी कम आती है। इंद्रप्रस्थ कॉलोनी दोपहर 2.30 बजे डोर-टू-डोर कचरा नहीं लेते
आरडीए ने इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाकर बेच दिया, लेकिन यहां पर सबसे बड़ी समस्या पानी की है। कॉलोनी के एलआईजी ब्लाक-ई निवासी आकाश कुमार ने बताया कि मेन टंकी का पाइप लाइन लीकेज हो जाता है। आरडीए टंकी की सफाई के नाम पर पानी की सप्लाई बंद कर देता है, जबकि आरडीए हर माह वहां के रहवासियों से पानी का 200 रुपये वसूलती है। इसके साथ ही सड़क का चेंबर खुला हुआ है। बारिश होने पर चेंबर नजर नहीं आएगा। इससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए गाडिय़ां नहीं आती। गेट के बाहर कचरा डंप करने लिए जगह बनाया गया है, लोग वहीं कचरा फेंक कर रहे हैं। दो-तीन दिन के बाद गाड़ी आती है और कचरा लेकर जाती है। इसके साथ ही सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। दो जिम्मेदार, दोनों के बयानों में विरोधाभास कोई लेटर नहीं आया
मेरे आने के बाद से आरडीए ने हैंड ओवर को लेकर किसी प्रकार का लेटर नहीं दिया है। इस कारण हैंड ओवर की प्रक्रिया के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
– विश्वदीप कुमार, आयुक्त रायपुर नगर निगम प्रक्रिया चल रही है
आरडीए की कॉलोनियों को निगम को हैंड ओवर करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में पत्राचार भी किया गया है। आगामी छह माह के भीतर इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
– आकाश छिकारा,सीईओ आरडीए रायपुर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *