बोकारो जिले के तेतुलिया में हुए 107 एकड़ वन भूमि घोटाला मामले में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त ने राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को पत्र लिखा है। मामले में अब तक जिला उपायुक्तों एवं वन पदाधिकारियों द्वारा की गई गलतियों पर पहल करने की अनुशंसा की है। पत्र में लिखा है कि पूर्व में बिहार सरकार की अधिसूचना के अनुसार 85.75 एकड़ भूमि अधिसूचित वन भूमि है। बोकारो वन प्रमंडल (तत्कालीन धनबाद वन प्रमंडल) के कुल 11 मौजा में कुल 908.98 एकड़ वन भूमि का नि:शुल्क हस्तांतरण पूर्व में एचएसएल व बीएसएल की परियोजनाओं व टाउनशिप निर्माण के लिए वर्ष 1962 में किया गया था। बाद में उपयोगी नहीं रहने के कारण प्रबंधन द्वारा विषयगत खाता प्लॉट की भूमि की वापसी की सूचना वन प्रमंडल पदाधिकारी धनबाद-बोकारो को दी गई। लेकिन किन कारणों से वन विभाग द्वारा उस समय इसका ग्रहण नहीं किया गया या उसकी सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए, यह जांच का विषय है। पत्र में बताया गया है कि अंचल कार्यालय में टिकैत रामेश्वर नारायण सिंह के नाम से कायम जमाबंदी को वर्ष 1984 या उसके पूर्व निरस्त किया जा चुका था। कालांतर में एक भिन्न रैयत इजहार हुसैन एवं अख्तर हुसैन के नाम से पंजी-टू में पुन: कराई गई एक फर्जी और अवैध प्रविष्टि को विलोपित किए जाने के बिंदु पर की गई कार्रवाई में जिला प्रशासन, बोकारो द्वारा उक्त तथ्यों की अनदेखी की गई। इस त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया का लाभ इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन को कोर्ट में िमला व सरकार का पक्ष हमेशा कमजोर रहा।


