आयुर्वेद महोत्सव व आरोग्य मेले का शुभारंभ, लोगों को मिलेगा इलाज

भास्कर न्यूज|बारां जिला मुख्यालय पर आयुर्वेद विभाग द्वारा आयोजित संभाग स्तरीय आयुर्वेद महोत्सव एवं आरोग्य मेले का शुक्रवार को मुख्य अतिथि कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने शुभारंभ किया। भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल सुमन ने अध्यक्षता की। भाजपा नगर अध्यक्ष ओमप्रकाश पारेता आदि विशिष्ट अतिथि रहे। आरोग्य मेला 10 फरवरी तक कोटा रोड़ स्थित खेल संकुल में प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 7 बजे तक चलेगा। शुभारंभ के बाद कलेक्टर ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित चिकित्सा एवं औषधि वितरण केंद्रों का अवलोकन किया। चिकित्सा विशेषज्ञों से चर्चा की। कलेक्टर तोमर ने स्टॉल संचालकों से विभिन्न उपचार पद्धतियों, उपलब्ध औषधियों और उनके प्रभावों की जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से पंचकर्म, जलौका अवचारण, अग्निकर्म, क्षारसूत्र चिकित्सा और होम्योपैथिक उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा। कलेक्टर ने कहा कि आयुर्वेदिक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली समाज को स्वस्थ जीवन प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि यह पद्धति सस्ती, सरल और सुलभ होने के साथ-साथ रोगों से बचाव व उपचार में प्रभावी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए संभाग स्तरीय आरोग्य मेलों का आयोजन किया जा रहा है। मेले में प्रत्येक सुबह साढ़े 6 से साढ़े 7 बजे तक योगाभ्यास, जबकि शाम 6 से 8 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 10 फरवरी को समापन समारोह आयोजित होगा। इस दौरान सहायक नोडल अधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार सोहाया एवं सहायक निदेशक डॉ. अजय कुमार नागर मौजूद रहे। चिकित्सा, परामर्श और औषधियां निशुल्क मिलेंगी अतिरिक्त निदेशक डॉ. मोहन लाल वर्मा ने बताया कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां न केवल रोगों का उपचार करती हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती हैं। मेला प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह हाड़ा ने बताया कि मेले में चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श, इलाज एवं औषधियों का वितरण किया जाएगा। डॉ. महिमा सनाढ्य ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता की जानकारी देते हुए कहा कि होम्योपैथी प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली है, जो शरीर की आत्म-उपचार क्षमता को बढ़ाकर रोगों को जड़ से समाप्त करने में सहायक होती है। डॉ. सनाढ्य ने बताया कि यह पद्धति क्रोनिक बीमारियों एलर्जी, अस्थमा, माइग्रेन, जोड़ों का दर्द, त्वचा रोग, मानसिक तनाव, पाचन संबंधी समस्याएं आदि के उपचार में बेहद कारगर है।

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