आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को घर-घर पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार की राजस्थान आदर्श ग्राम योजना के तहत उदयपुर जिले की पांच ग्राम पंचायतों बंबोरा, कोलियारी, बदराणा, बग्गड़ व नाई का चयन किया गया है। पंचायतों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और जन-जागरूकता के कड़े मानकों पर खरा उतरकर खुद को आदर्श ग्राम के रूप में स्थापित करना होगा। इसके लिए सरकार ने 18 पैरामीटर्स तय किए हैं। जो पंचायत इन सभी मानकों को शत-प्रतिशत पूरा करेगी, उसे 11 लाख का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा। वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. शोभालाल औदीच्य ने बताया कि प्रत्येक जिले में पांच-पांच गांवों का चयन किया जा रहा है, ताकि आयुर्वेद के लिहाज से इसे मजबूत बनाया जा सके। 18 पैरामीटर तय, गांवों को इन पर खरा उतरना होगा स्वास्थ्य जांच : एक मशीन या पेपर के माध्यम से ये देखा जाएगा कि व्यक्ति की दिनचर्या व स्वभाव कैसा है। इसके साथ ही मधुमेह स्क्रीनिंग, मोतियाबिंद जांच और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों का विशेष स्वास्थ्य परीक्षण होगा। महिला-शिशु कल्याण : एनीमिया (रक्ताल्पता) की स्क्रीनिंग, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, प्रसव पूर्व देखभाल और संपूर्ण टीकाकरण। सामाजिक सुधार : तंबाकू मुक्त गांव, टीबी और मीजल्स-रूबेला मुक्त पंचायत। जीवनशैली : औषधि पादपों का रोपण, घरेलू उपचार की जानकारी और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना। डिजिटल रिकॉर्ड : प्रत्येक परिवार का हेल्थ प्रोफाइल रिकॉर्ड और आयुष्मान आरोग्य योजना में पंजीकरण। बीमारी के इलाज नहीं, बचाव पर आधारित रहेगी योजना योजना के जिला सहायक नोडल अधिकारी डॉ. ललित सिंह देवड़ा ने बताया कि हर गांव से स्वयंसेवकों के रूप में आयुष मित्र और आयुष सखी का चयन किया जा रहा है। इन्हें विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे। यह योजना केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रिवेंटिव हेल्थ-केयर (बीमारी से बचाव) पर आधारित है। यह पहल ग्रामीणों को पारंपरिक जड़ों से जोड़ते हुए आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ दिलाएगी। योजना के तहत औषधि पादपों के रोपण को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण न केवल घरेलू उपचार के प्रति जागरूक होंगे, बल्कि गांव का पर्यावरण भी शुद्ध होगा।


