रांची सदर अस्पताल देश में मॉडल बन गया है। आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में जिला अस्पताल की श्रेणी में रांची सदर अस्पताल देशभर में नंबर-1 पर रहा। वहीं मेडिकल कॉलेज और सरकारी संस्थानों की श्रेणी में इसे राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान मिला। इस अस्पताल में अब तक दो लाख से अधिक आयुष्मान मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इसमें सामान्य बीमारी से लेकर जटिल ऑपरेशन तक शामिल है। मरीजों को बिना कुछ खर्च किए यहां बेहतर इलाज मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इसे झारखंड के लिए गौरव का क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक मेहनत का नतीजा है। यह दर्शाता है कि अगर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठ होकर काम किया जाए तो सरकारी अस्पताल भी निजी अस्पतालों को मात दे सकता है। इस उपलब्धि से झारखंड के सभी अस्पतालों को प्रेरणा मिलेगी। वहीं स्वास्थ्य सचिवालय के अधिकारियों ने कहा कि राज्य के सभी सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों को इस मॉडल के अनुरूप विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ढाई साल में 69 करोड़ का क्लेम मिला साल केस क्लेम 2023-24 31,919 22.52 करोड़ 2024-25 31,683 32.72 करोड़ 2025-26 9,417 13.59 करोड़
(नोट : पॉलिसी ईयर फरवरी से फरवरी तक) इस पहल ने बनाया अव्वल: सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं में लगातार विस्तार पिछले कुछ सालों में रांची सदर अस्पताल ने एक नया प्रयोग किया। इसके तहत आयुष्मान मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पताल के डॉक्टरों की सेवा ली। यह प्रयोग सफल रहा। अभी यहां 25 से ज्यादा स्पेशलिस्ट डॉक्टर कार्यरत हैं। यहां हृदय रोग, किडनी, नेत्र रोग, अस्थि रोग और जोड़ प्रत्यारोपण सहित कई सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं हैं। इससे रांची ही नहीं, आसपास के जिले के मरीजों को भी लाभ मिल रहा है।


