आरएनटी मेडिकल कॉलेज:टीबी निवारण केंद्र की सूरत बदलेगी, माइनर ओटी-हाईटेक लैब और ओपीडी रूम बनेंगे

आरएनटी मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित जिला क्षय (टीबी) निवारण केंद्र की सूरत बदलने की तैयारी है। यहां माइनर ओटी, हाईटेक लैब, ओपीडी रूम व कॉन्फ्रेंस हॉल बनवाए जाएंगे। बिल्डिंग का रंग-रोगन, नई बैंच-अलमारी, मरम्मत, सिविल वर्क समेत अन्य काम भी होंगे। मार्च अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
अभी यह केंद्र जर्जर अवस्था में है। ज्यादातर जगह कबाड़ रखा हुआ है। यहां एक भी कॉन्फ्रेंस या मीटिंग हॉल नहीं है, जबकि जिलेभर के मेडिकल स्टूडेंट्स व डॉक्टर्स को कई बार यहां ट्रेनिंग दी जाती है। यह केंद्र भले ही आरएनटी मेडिकल कॉलेज परिसर में हाथीपोल की तरफ वाले प्रवेश द्वार पर बना हुआ है, लेकिन यह इस कॉलेज के अधीन नहीं है। ऐसे में जिला टीबी विभाग यहां पक्के निर्माण की जगह एल्युमीनियम शीट्स सहित अन्य चीजों से विकास कार्य करवाएगा। जिला टीबी अधिकारी डॉ. आशुतोष सिंघल ने बताया कि केंद्र में रेनोवेशन कार्य के लिए ई-टेंडर किए गए हैं। ये 15-16 फरवरी को खुल जाएंगे। इसके बाद वर्क ऑडर जारी होंगे। अब यहां ऑपरेशन भी होंगे, बड़ी अस्पताल का भार घटेगा इस केंद्र की ओपीडी को रेनोवेट किया जाएगा। यहां बने स्टोर रूम को माइनर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में बदला जाएगा। इसमें एक बेड व सभी जरूरी मशीनें लगाई जाएंगी। अभी यहां चेस्ट के 2 डॉक्टरों की नियुक्ति है। प्रतिदिन 50-60 टीबी मरीजों की ओपीडी है। इसके बावजूद सभी मरीजों को बड़ी स्थित टीबी अस्पताल में ही भेजा जाता है। यहां माइनर ओटी बनने के बाद प्राइमरी ट्रीटमेंट व ऑपरेशन यही हो पाएंगे। इसमें अभी लिम्फ नोड एस्पिरेशन, न्यूमोथोरैक्स और फेफड़ों में पानी भरने की समस्या आदि के रोगियों को फायदा मिलेगा। गंभीर मरीजों को बड़ी स्थित अस्पताल में भेजा जाएगा। उस अस्पताल पर भी भार कम होगा। बड़ी अस्पताल में अभी इन तीनों बीमारियों के ऑपरेशन के लिए ही रोज 30-40 मरीज रहते हैं। लैब को बैक्टीरिया फ्री बनाएंगे, एनएबीएच सर्टिफिकेट भी लेंगे
केंद्र में अभी टीबी टेस्टिंग के लिए दो लैब हैं। इनमें लाखों की मशीनें हैं। इन्हें 5 लाख रुपए के बजट से हाई-टेक किया जाएगा। इन्हें एनएबीएच सर्टिफिकेट दिलवाने के लिए भी प्रयास होंगे। दोनों लैबों में एंटी-बैक्टीरिया फ्लोरिंग, अल्ट्रा-वॉयलेट लाइट सहित अन्य काम होंगे। एनएबीएच सर्टिफिकेट अस्पतालों और लैब्स को दी जाने वाली मान्यता है जो गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा के लिए तय मानकों का पालन करने पर दी जाती है। उदयपुर में 11 हजार एक्टिव रोगी, जयपुर में इससे महज 200 ज्यादा
प्रदेश में जयपुर के बाद सबसे ज्यादा टीबी के मरीज उदयपुर में हैं। अभी जिले में 11 हजार एक्टिव मरीज हैं। जयपुर में उदयपुर के मुकाबले औसतन 100-200 मरीज ही अधिक रहते हैं। परिसर में ही खाली पड़ी जमीन को अभी पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी के एक हिस्से में अब कॉन्फ्रेंस हॉल बनवाएंगे। इसमें टीबी विभाग की ट्रेनिंग व अन्य मीटिंग हो सकेगी। यह एल्युमीनियम की शीट्स से बनाया जाएगा।

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