आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबी अस्पताल की बर्न यूनिट में 4 बेड का स्पेशल आईसीयू तैयार किया जाएगा। इससे बर्न के गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। अभी तक यहां अलग से आईसीयू नहीं होने के कारण आग से जलकर आने वाले गंभीर लोगों को भी सर्जिकल आईसीयू में ही रखा जाता है। इससे उनके साथ अन्य मरीजों में भी इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। कई बार इस आईसीयू में बेड खाली नहीं होने पर गंभीर मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। दैनिक भास्कर ने 29 जनवरी को इस मामले को उठाया था। इसके तहत बर्न यूनिट के वार्ड की अव्यवस्थाओं के अलावा स्टाफ की कमी व आईसीयू नहीं होने से मरीजों को हो रही परेशानी उजागर की थी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्थाओं में बदलाव का फैसला लिया। अब बंद पड़े स्टोर रूम को खाली कराया गया है और उसकी जगह आईसीयू का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें 4 बेड के अलावा वेंटिलेटर, मॉनीटर, मशीनें, एसी समेत अन्य सभी मेडिकल उपकरण होंगे। 24 घंटे रहेंगे डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ
आईसीयू को बर्न के पूरे प्रोटोकोल के साथ तैयार किया जा रहा है। इसमें नर्सिंग व डॉक्टर समेत 6-7 लोगों का अतिरिक्त स्टाफ भी 24 घंटे तैनात रहेगा। आईसीयू के बाहर सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात किया जाएगा। एमबी अस्पताल में प्रति माह औसतन 35-40 बर्न के मरीज आते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा फ्लेम बर्न और स्काल्ड बर्न के मरीज होते हैं। ज्यादातर मरीज 50 फीसदी से अधिक झुलसे हुए रहते हैं। इन्हें तत्काल आईसीयू की जरूरत होती है। यह इसलिए जरूरी दो सप्ताह पहले 80% झुलसी महिला को नहीं मिला था आईसीयू, गंवानी पड़ी जान
बीते 26 जनवरी को सूरजपोल चौराहे पर एक महिला ने देर रात खुद को आग लगा ली थी। वह 80 प्रतिशत तक झुलस गई थी। उसे इलाज के लिए तुरंत आईसीयू की जरूरत थी, लेकिन समय पर आईसीयू नहीं मिलना तो दूर बर्न वार्ड तक में बेड खाली नहीं मिला। मजबूरी में महिला को सर्जरी के आईसीयू में अन्य मरीजों के साथ शिफ्ट किया गया। अन्य मरीजों को भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया। बाद में महिला की मौत हो गई। इसी के तुरंत बाद भास्कर ने पड़ताल की ताे मालूम चला कि अस्पताल में बर्न के लिए आईसीयू ही नहीं है। चार बेड, वेंटिलेटर, एसी समेत अन्य उपकरण लगे होंगे मौजूदा बर्न वार्ड में भी नए कंबल-बेडशीट दिए, एक ही परिजन को एंट्री : भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद मौजूदा बर्न वार्ड की व्यवस्थाओं में भी सुधार किया गया है। सभी मरीजों को प्रोटोकोल के तहत नए कंबल, बेडशीट आदि दिए गए हैं। वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन को ही एंट्री दी जा रही है। शू कवर और मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने बताया कि बर्न यूनिट में आईसीयू के लिए काम शुरू हो गया है। प्रोटोकोल के तहत सभी संसाधन जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही यह शुरू कर दिया जाएगा। भविष्य में मरीजों के भार को देखते हुए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। बता दें कि इससे पहले भास्कर के सवाल पर अस्पताल प्रबंधन ने सरकार से बजट मिलने पर आईसीयू की व्यवस्था करने की बात कही थी। हर माह 35-40 रोगी, अधिकांश 30% से ज्यादा जले हुए करीब डेढ़ साल पहले आरएनटी से संबंद्ध सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (एसएसएच) में बर्न पेशेंट के लिए स्पेशल वार्ड रिजर्व था। प्लास्टिक सर्जन डॉ. आरके पालीवाल के रिटायरमेंट के बाद इसे बंद कर दिया गया।
प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न डिपार्टमेंट को अलग-अलग किया गया। प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट को एसएसएच में ही रखा गया, जबकि बर्न को एमबी के अधीन संचालित कर दिया। तबसे बर्न वार्ड एमबी की बिल्डिंग में ही चल रहा है। ये अभी सर्जरी डिपार्टमेंट के अधीन है। यहां मात्र 15 बेड का जनरल बर्न वार्ड है, जबकि यहां पूरे संभाग से मरीज पहुंचते हैं। संभाग में कहीं भी स्पेशल बर्न यूनिट नहीं है। हर माह यहां औसतन 35-40 मरीज यहां आते हैं। इनमें से ज्यादातर 30 फीसदी से अधिक बर्न के हाेते हैं। इन्हें सीधे स्पेशल बर्न आईसीयू में शिफ्ट किए जाने की जरूरत होती है, लेकिन इन्हें या तो वार्ड में ही रखा जाता है या सर्जरी आईसीयू में। शहर में किसी भी प्राइवेट अस्पताल में भी इसकी सुविधा नहीं है। ऐसे में ज्यादातर मरीज अहमदाबाद रेफर किए जाते हैं। जयपुर, जोधपुर में भी मरीजों को शिफ्ट किया जाता है।


